मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान, हुई रेकॉर्ड खरीदी

भोपाल
 मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन (एमटी) रहने का अनुमान है। यह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए खरीद के लक्ष्य 80 लाख एमटी से अधिक है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि करीब 8.76 लाख पंजीकृत किसानों से 76 लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीद प्रक्रिया जिसमें केवल पंजीकृत किसानों से ही तौल करना शामिल है, अतिरिक्त पांच दिनों तक जारी रहेगी।

राज्य ने 15 मार्च को गेहूं खरीद अभियान शुरू किया था और अपने 4,000 निर्धारित खरीद केंद्रों पर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत की पेशकश की थी। पिछले साल मध्य प्रदेश में 5.85 लाख किसानों से 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। जल्द ही अपडेटेड आंकड़े आने की उम्मीद है, मंगलवार तक खरीद 81 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। सरकार को अब इस सीजन में कुल 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद होने की उम्मीद है।

घर बैठे करा सकते हैं नामांकन

इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि अब तक किसानों को उनकी उपज के भुगतान के लिए 16,472 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने एसएमएस के माध्यम से किसानों को पंजीकृत किया और एक समर्पित वेब या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर से नामांकन करने का विकल्प प्रदान किया। किसान ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और तहसील कार्यालयों में स्थित सुविधा केंद्रों पर भी पंजीकरण करा सकते हैं।

175 रुपए का मिलेगा बोनस

केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी संशोधित किया है, इसे 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश 2,600 रुपए प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य प्रदान करेगा, जिसमें 175 रुपए प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी शामिल है।

मध्य प्रदेश में सीहोर, उज्जैन, नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और देवास जिलों में मालवा पठार के कम वर्षा वाले क्षेत्र में शरबती और डरम जैसी कुछ कम सिंचित उच्च उपज वाली किस्में उगाई जाती हैं। इन सभी किस्मों में से शरबती सबसे पसंदीदा किस्म है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन होता है।

 किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका
मध्‍य प्रदेश में गेहूं की एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रक्रिया 5 मई को खत्‍म हो गई, लेकिन सरकार ने अभी भी कई किसानों को 9 मई तक गेहूं बेचने का मौका दिया है. ऐसे में जानिए आखिर पूरा मामला क्‍या है और कौन-से किसान फसल बेचने के लिए पात्र हैं… दरअसल, ऐसे किसान जिन्‍होंने स्‍लॉट तो बुक किए थे, लेकिन उनकी वैलिड‍िटी खत्‍म हो गई है, उन्‍हें 9 मई तक अपनी फसल बेचने का मौका दिया गया है. इसके लिए अफसरों को डीएसओ लॉगिन के जरिए स्‍लॉट की अवधि‍ बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसे लेकर खाद्य विभाग ने अफसरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
गेहूं की सबसे ज्‍यादा सरकारी कीमत MP में

वहीं, सरकार ने 5 मई तक खरीद के लिए 30 अप्रैल तक स्‍लॉट बुक करने की मोहलत दी थी, लेकिन खरीद के अंतिम दिन भी किसानों को ऑफलाइन स्‍लॉट बुक करने का ऑप्‍शन दिया गया और वे फसल बेच सके. मालूम हो कि प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 15 मार्च से 5 मई तक चली. इस दौरान किसानों को 2425 रुपये प्रत‍ि क्विंटल एमएसपी और 175 रुपये प्रत‍ि क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया यानी 2600 रुपये प्रति क्विंटल. हालांकि, उपज में नमी और क्‍वालिटी के चलते कीमत में अंतर आना सामान्‍य है.
प्रदेश में हुआ गेहूं का बंपर उत्‍पादन

मध्‍य प्रदेश में इस साल ग‍ेहूं की अच्‍छी फसल हुई है, जिसके चलते मंडियों में नई फसल की बंपर आवक दर्ज की गई. राज्‍य के सीएम मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को गेहूं की जितनी कीमत मिल रही है, वह सभी राज्‍यों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है. व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि एमएसपी और बोनस मिलने के कारण किसानों ने निजी व्‍यापारियों की जगह सरकारी एजेंसियाे को गेहूं बेचना पसंद किया. बीते हफ्ते ही केंद्र ने मध्‍य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्‍य मिल‍ियन टन बढ़ा दिया था.
312 LMT है खरीद का अनुमानित लक्ष्‍य

वहीं, देश के अन्‍य राज्‍यों में भी केंद्रीय पूल के तहत गेहूं की खरीद चल रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने सभी प्रमुख राज्‍यों में गेहूं खरीद को लेकर आंकड़े जारी किए थे. इसमें 30 अप्रैल 2025 तक रबी मार्केटिंग सीजन यानी आरएमएस 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद के लिए तय 312 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य की तुलना में केंद्रीय पूल में 256.31 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. इस साल 30 अप्रैल तक खरीदे गए गेहूं की मात्रा पिछले साल की इसी तारीख को हुई कुल खरीद 205.41 लाख मीट्रिक टन से 24.78 प्र‍तिशत ज्‍यादा है. प्रमुख गेहूं उत्‍पादक राज्‍यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा खरीद हुई है.

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