छत्तीसगढ़

राजनांदगांव : शादी,खेती करने, वाहन खरीदने नहीं बेच पा रहे जमीन…

राजनांदगांव , प्रदेश सरकार ने जमीन डायवर्सन की प्रक्रिया को ऑनलाइन तो कर दिया, लेकिन पोर्टल में छोटे टुकड़ों का पार्ट डायवर्सन विकल्प नहीं है। इससे जिले में जमीनों की खरीदी-बिक्री बुरी तरह प्रभावित हो गई। दो साल से किसान, व्यापारी रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोग तहसीलों के चक्कर काटने मजबूर है। पेंड्री-मनकी प्रस्तावित 14 किमी बाइपास बनाने दस माह पहले से लगे प्रतिबंध से रजिस्ट्री कम हो रही। इससे जहां लोग परेशान है वहीं रजिस्ट्री कम होने से राजस्व का नुकसान भी होगा।

जमीन के छोटे हिस्से का डायवर्सन कराने वाले आवेदकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि भुईंयां पोर्टल में केवल पूरी जमीन का डायवर्सन कराने का विकल्प है। किसी को 20 में केवल 10 डिसमिल का उपयोग करना है, तब भी उसे पूरी जमीन का डायवर्सन कराने की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। इससे खर्च कई गुना बढ़ने के साथ कानूनी और राजस्व संबंधित बोझ भी बढ़ता है। अफसर शासन स्तर पर पोर्टल में सुधार होने की बात कर रहे हैं। तहसीलों में डायवर्सन सैकड़ों मामले लंबित हैं।

यह व्यवस्था आम लोगों के लिए बाधा बन गई है बारिश में खेतों में फसल खड़ी होने के कारण रजिस्ट्री कम होती है। डायवर्सन की बाध्यता, सरकारी गाइडलाइन में बदलाव खरीदी-बिक्री पर बेन, जमीनों की बढ़ी कीमतों के कारण रजिस्ट्री प्रभावित हुई है। महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर मिलने वाली छूट के बाद भी डायवर्सन की बाध्यता और कई जगह बेन लगने के कारण रजिस्ट्री कम होने से राजस्व का नुकसान होगा। डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना था, लेकिन विकल्प नहीं होने के कारण यह व्यवस्था आम लोगों के लिए बाधा बन गई है।

पीडब्ल्यूडी के ईई एसके चौरसिया का कहना है कि हमारा काम केवल एस्टीमेट बना कर भेजना है। बाकी काम अपर लेवल पर होना है। अभी पेंड्री-मनकी 14 किमी के बाइपास में कोई अपडेट नहीं है। पोर्टल में जमीन छोटे टुकड़ों का डायवर्सन नहीं होने के मामले में तहसील कार्यालय के अफसरों ने बात करने से इंकार कर दिया। केवल शासन स्तर का मामला होने की जानकारी दी गई। वहीं से सुधार होने की बात कही है। तहसील कार्यालयों में डायवर्सन से संबधित बड़ी संख्या में आवेदन पेंडिंग पड़े हैं।

शहर के व्यापारी नरेन्द्र जैन ने बताया कि खैरागढ़ में उनकी 80 डिसमिल जमीन में केवल 20 डिसमिल पर दुकान बनानी है, लेकिन पोर्टल में छोटे टुकड़े का डायवर्सन का विकल्प नहीं है। सालभर से चक्कर लगा रहे हैं। अन्य किसान, आम लोग शादी-ब्याह, इलाज, शिक्षा के लिए जमीन नहीं बेच पा रहे। प्रोजेक्ट थमे पड़े हैं। कृषि उपकरण, वाहन निवेश के लिए पूंजी नहीं है। पुराने सौदों की रजिस्ट्री अटकी है। पूरी जमीन का डायवर्सन से बढ़ेगा। 1 हजार की जगह 5 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। परेशानी बढ़ती ही जा रही है।

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