CG : पटवारी फरार हुआ बकरा बैल और नकदी लेकर, बस्तर का चर्चित मामला …

CG : पटवारी फरार हुआ बकरा बैल और नकदी लेकर, बस्तर का चर्चित मामला …

बस्तर। डिजिटल युग में भी सरकारी दफ्तरों में काम कराने के बदले क्या-क्या दांव पर लगाना पड़ता है, इसकी एक बानगी बस्तर जिले में देखने को मिली है। बकावंड तहसील के कोलावल हल्का में पदस्थ एक पटवारी साहब को रिश्वत की ऐसी ‘भूख’ जागी कि उन्होंने ग्रामीणों से सिर्फ नोट ही नहीं, बल्कि बकरे और बैल तक वसूल लिए। हद तो तब हो गई जब यह सब डकारने के बाद भी साहब ने ग्रामीणों का पट्टा नहीं बनाया और चुपके से रफूचक्कर हो गए। अब दर्जनों ग्रामीण अपने बकरे, बैल और गाढ़ी कमाई के पैसे गंवाकर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

यह पूरा मामला कोलावल, मैलबेड़ा, रताखंडी और भिरेंडा गांवों का है, जहां वर्षों से लंबित राजस्व मामलों को निपटाने का झांसा देकर पटवारी ने बड़ी वसूली की। पीड़ित ग्रामीण मंगतू ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पट्टा बनवाने के एवज में पटवारी ने उससे 40 हजार रुपये नगद और एक जिंदा बकरा रिश्वत में ले लिया, लेकिन काम आज तक नहीं हुआ। वहीं, संपत नाम के एक अन्य ग्रामीण की कहानी और भी भावुक करने वाली है। संपत ने बताया कि सरकारी कागज बनवाने के लिए उसने अपने कलेजे के टुकड़े यानी ‘एक जोड़ी बैल’ बेच दिए। बैलों को बेचने से मिले 45 हजार रुपयों में से 30 हजार रुपये पटवारी की जेब में डाल दिए, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। इसके अलावा, लालाराम से 10 हजार रुपये की एडवांस वसूली की गई और रूपसाय नामक ग्रामीण से किश्तों में 55 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। पैसे और मवेशी हाथ में आते ही पटवारी साहब ने अपना फोन बंद कर लिया और क्षेत्र से गायब हो गए।

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