राजनांदगांव : आत्मनिर्भर बन रही राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतें – ग्राम पंचायत मुसराकला, अछोली और अर्जुनी के घर-घर पहुंची सौर ऊर्जा, अतिरिक्त बिजली उत्पादन से बन रहे ऊर्जादाता

राजनांदगांव : आत्मनिर्भर बन रही राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतें - ग्राम पंचायत मुसराकला, अछोली और अर्जुनी के घर-घर पहुंची सौर ऊर्जा, अतिरिक्त बिजली उत्पादन से बन रहे ऊर्जादाता

– प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही गांवों की तस्वीर
राजनांदगांव । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से राजनांदगांव जिले में स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। डोंगरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत मुसराकला, अछोली एवं डोंगरगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत अर्जुनी इस योजना के सफल क्रियान्वयन से आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी हैं। इन ग्राम पंचायतों में बड़ी संख्या में ग्रामीण रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर न केवल अपना बिजली बिल शून्य कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर ऊर्जा संरक्षण और आय अर्जित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
डोंगरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत मुसराकला में अब तक 29 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। 10 आवेदन स्थापना की प्रक्रिया में हैं तथा 16 नए परिवारों ने भी योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया है। ग्राम पंचायत की सरपंच गायत्री टेम्भुरकर ने बताया कि उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में ग्राम सभा, पंचायत बैठकों तथा व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से लगातार लोगों को योजना की जानकारी दी जा रही है, जिससे ग्रामीण बड़ी संख्या में योजना से जुड़ रहे हैं। सरपंच गायत्री ने बताया कि वे स्वयं ने माह अप्रैल 2026 में अपने घर पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित कराया। पहले उनके घर का बिजली बिल लगभग 1200 रूपए प्रतिमाह आता था, लेकिन अब बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी हो रहा है, जिसका लाभ आगामी समय में मिलेगा।
इसी तरह ग्राम पंचायत अछोली में भी योजना को लेकर लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। यहां लगभग 50 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं तथा 15 से अधिक नागरिकों ने पंजीयन कराया है जो प्रक्रियाधीन हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच नंद कुमार साहू ने बताया कि पंचायत स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाकर बिजली विभाग, बैंक तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को योजना की पूरी जानकारी दी गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि पहले कई परिवारों का मासिक बिजली बिल 1000 रूपए से 2 हजार रूपए तक आता था, जबकि अब बिजली बिल शून्य होने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर भविष्य में आय प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
डोंगरगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत अर्जुनी में भी लगभग 47 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। गांव में दूर से दिखाई देने वाले सोलर पैनल ग्रामीणों की जागरूकता और बदलती सोच का प्रतीक बन गए हैं। ग्राम पंचायत की सरपंच ललिता साहू ने बताया कि ग्रामीणों को घर-घर जाकर योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्राम सभा और सूर्यसभा आयोजित कर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण प्रेरित होकर अपने घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे भी स्वयं लगभग 4 माह पूर्व अपने घर पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर संयंत्र लगाया। पहले उनके घर का बिजली बिल 1800 से 2000 रूपए प्रतिमाह तथा गर्मी के मौसम में 3 हजार रूपए से अधिक तक पहुंच जाता था, जबकि अब बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। लोग इसे केवल बिजली बचत का माध्यम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी साधन मान रहे हैं। योजना से लाभान्वित परिवार स्वयं अन्य लोगों को प्रेरित कर रहे हैं, जिससे गांवों में सौर ऊर्जा अपनाने का अभियान जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जिले में अब तक योजना के अंतर्गत 8 हजार 871 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 4 हजार 317 हितग्राहियों के घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। 3 हजार 205 हितग्राहियों को शासन की ओर से सब्सिडी का लाभ प्राप्त हो चुका है तथा 1 हजार 155 परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। शेष प्रकरणों में दस्तावेजों का सत्यापन, संयंत्र स्थापना एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं तेजी से पूर्ण की जा रही हैं।

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