राजनांदगांव : प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज है…

राजनांदगांव , शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा महान कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर उनकी कहानियों एवं उपन्यासों पर केंद्रित समीक्षा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य पर अपनी समीक्षाएं प्रस्तुत कीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सदैव प्रासंगिक रहा है और आज भी प्रासंगिक है। उनका संपूर्ण साहित्य भारतीय समाज का एक ज्वलंत और जीवंत दस्तावेज है। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने विद्यार्थियों को कहानी और उपन्यास की समीक्षा करने की बारीकियों और तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया। वहीं, विभागीय प्राध्यापक डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने प्रेमचंद के जीवन और उनके साहित्यिक सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रेमचंद किसानों,खेतिहर मजदूरों की पीड़ा के सच्चे कलमकार थे।

समीक्षा प्रतियोगिता के परिणाम और पुरस्कार वितरण: प्रतियोगिता के दौरान 13 विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के साथ-साथ सुदर्शन और माधवराव सप्रे की प्रसिद्ध कहानियों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। जिसमें पहला स्थान अनन्या स्वर्णकार, दूसरा चेतना सिन्हा व तृतीय स्थान शिफा अली ने हासिल किया। सभी विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता के हाथों हिंदी विभाग के वार्षिक एकेडमिक कैलेंडर का विमोचन किया गया। इसके साथ ही भारतीय संस्कार और संस्कृति त्रैमासिक कोर्स सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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