कृषि उपज मंडी नया बस स्टैंड के पास डोंगरगढ़ में तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ का समापन हुआ। अंतिम दिवस के कार्यक्रम का शुभारंभ जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी की सिद्ध चरण पादुका पूजन के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने तीर्थक्षेत्र नाणीजधाम का दर्शन किया। इसके बाद 231 श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी से ऑनलाइन नामदीक्षा (नामदान) ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने का संकल्प लिया।
रामानंद संप्रदाय की परंपरा में नामदान को गुरु-शिष्य संबंध, भक्ति-साधना की महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में समझाया गया। इसकी मूल भावना गुरु की शरण में आकर भगवान के नाम का आश्रय लेना तथा अपने जीवन को भक्ति, सदाचार एवं सेवा की दिशा में समर्पित करना है। नामदान के माध्यम से साधक अपने जीवन की दिशा भगवान की ओर मोड़ने का संकल्प करता है, गुरु के मार्गदर्शन में नाम-स्मरण, भक्ति, सेवा व सदाचार को अपने आध्यात्मिक जीवन का आधार बनाता है।
जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने ऑनलाइन प्रवचन के माध्यम से नामभक्ति के महत्व बताते हुए कहा कि मनुष्य का मन स्वभाव से चंचल होता है, जो उसे लक्ष्य से भटका सकता है। भक्ति के माध्यम से अंतरमन, बहिरमन की एकाग्रता बढ़ती है, जिससे निर्णय क्षमता, संयम, विवेक, साहस व सकारात्मक विचारों का विकास होता है। श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार एवं सेवा के मार्ग पर चलते हुए जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। समापन अवसर पर रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़ के उपपीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी, पीठ सदस्य सच्चिदानंद उपासने, पीठ सह प्रमुख मुन्नालाल मोटघरे आदि उपस्थित थे।














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