अध्यक्ष पद के लिए गुटों ने संभाली कमान, चुनाव में नेताओं की ताकत और युवाओं की पसंद की होगी परीक्षा
राजनांदगांव। यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव की घोषणा के साथ ही शहर की युवा राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर जहां युवा नेताओं ने अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करनी शुरू कर दी है, वहीं कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक गुटों की सक्रियता ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बड़े नेताओं और उनके समर्थक गुटों ने अध्यक्ष पद के लिए अपने-अपने पसंदीदा चेहरे मैदान में उतार दिए हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि यह चुनाव वास्तव में युवा कार्यकर्ताओं की पसंद का होगा या फिर इसके पीछे गुटीय राजनीति और नेताओं की ताकत काम करेगी।
चर्चाओं के अनुसार जितेंद्र मुदलियार गुट से अमर झा, देशमुख गुट से तनिष्क श्यामकर, आसिफ अली के समर्थन से अनीश खान और निखिल द्विवेदी के समर्थन से विप्लव शर्मा अपनी-अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं।
इन नामों के सामने आने के बाद यूथ कांग्रेस का चुनाव केवल संगठन का चुनाव नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं की राजनीतिक पकड़ और गुटीय प्रभाव की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
गुटों की राजनीति के बीच जमीनी कार्यकर्ता कहां?
यूथ कांग्रेस का नाम भले ही युवाओं के संगठन के रूप में लिया जाता हो, लेकिन चुनावी मैदान में नेताओं के समर्थक उम्मीदवारों की चर्चा ने जमीनी और लंबे समय से संगठन में सक्रिय युवाओं की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि वर्षों से छात्र राजनीति, सामाजिक गतिविधियों और संगठन में काम करने वाले युवाओं को क्या इस चुनाव में पर्याप्त अवसर मिलेगा या फिर राजनीतिक समर्थन ही जीत-हार का सबसे बड़ा आधार बनेगा।
मजबूत दावेदारों की दूरी भी बनी चर्चा
इस चुनाव में कई ऐसे युवा नेता भी चर्चा में रहे, जिन्हें संगठनात्मक अनुभव और जमीनी सक्रियता के कारण अध्यक्ष पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने चुनावी मैदान में औपचारिक रूप से कदम नहीं बढ़ाया।
इन्हीं नामों में युवा नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले शास्त्री लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं। छात्र संघ की जिम्मेदारियों से लेकर पार्षद और यूथ कांग्रेस उपाध्यक्ष तक का राजनीतिक अनुभव रखने के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
उनकी चुनावी मैदान से दूरी ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को जरूर जन्म दिया है, लेकिन उनकी जमीनी सक्रियता और युवा कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को लेकर कोई सवाल नहीं है।
कई चर्चित नाम भी रहे दौड़ में
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर प्रदेश महासचिव राजा यादव, ऋषभ निर्मलकर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव विशु आजमानी, रजत तिवारी, पूर्व अध्यक्ष गुरभेज माखीजा, पूर्व महासचिव क़ादिर सोलंकी, महेश साहू और आशीष रामटेके जैसे युवा नेताओं के नाम भी राजनीतिक गलियारों में प्रमुखता से चर्चा में रहे।
हालांकि इनमें से कई नेताओं ने औपचारिक रूप से चुनावी मैदान में कदम नहीं बढ़ाया, लेकिन नामों की चर्चा से यह साफ है कि यूथ कांग्रेस की राजनीति में अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारों की कमी नहीं थी।
मोबाइल ऐप से सदस्यता, ऑनलाइन मतदान
यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में सदस्यता प्रक्रिया मोबाइल ऐप के माध्यम से होगी, जबकि मतदान ऑनलाइन कराया जाएगा। ऐसे में अध्यक्ष पद का अंतिम फैसला युवा सदस्यों के वोट से तय होगा।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राजनांदगांव यूथ कांग्रेस की कमान किसके हाथों में जाती है।
बड़ा सवाल…
क्या यूथ कांग्रेस का नया अध्यक्ष वास्तव में जमीनी युवा कार्यकर्ताओं की पसंद से चुना जाएगा या फिर गुटों का राजनीतिक गणित चुनावी नतीजों पर असर डालेगा?
यूथ कांग्रेस का चुनाव अभी शुरू हुआ है, लेकिन राजनांदगांव की राजनीति में कुर्सी के साथ-साथ गुटों की ताकत और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।














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