डोंगरगढ़/कलकसा जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में 9 सितंबर को समान नागरिक संहिता समिति की समूह चर्चा व परिचयात्मक बैठक हुई। अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस एमके राऊत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ.ज्योति रानी सिंह, संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ दुर्गा प्रसाद अधिकारी की उपस्थिति रही।
संभाग स्तरीय बैठक में आमंत्रित सर्वसमाज के सामाजिक, धार्मिक, सत्ता पक्ष व विपक्ष के राजनीतिक प्रतिनिधि, साहित्यकारों, अधिवक्ताओं व बुद्धिजीवियों ने विवाह व तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार व विरासत तथा लिव इन संबंध विषय पर अपने विचार रखे। यूसीसी के पक्ष व विपक्ष में अपनी महत्वपूर्ण विचार व सुझाव प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में संभाग के चार जिलों से आए सर्व आदिवासी समाज के विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठन के समाज प्रमुखों व आदिवासी सामाजिक प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता के विपक्ष में अपनी विचार, अनुभव व सुझाव व्यक्त करते हुए विरोध दर्ज कराया। आदिवासी(जनजातीय) समाज प्रमुखों ने कहा कि यूसीसी आदिवासी समाज के सामाजिक व्यवस्था,सामाजिक संस्कृति, प्राचीन व गौरवशाली आदिवासी रूढ़ी-प्रथा-परम्परा के खिलाफ है। समान नागरिक संहिता को अगर छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज पर जबरन थोपा गया तो छत्तीसगढ़ के सर्व आदिवासी समाज के द्वारा विरोध प्रदर्शन करने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
आपत्ति दर्ज करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए समान नागरिक संहिता समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाय। आपत्ति दर्ज करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक,सामाजिक व सांस्कृतिक अधिकारों के साथ पूर्ण संरक्षण दिया जाए। आदिवासी समाज पर समान नागरिक संहिता जबरन लागू न किया जाए। आपत्ति दर्ज कराने वाले प्रशांत कोड़ापे, गोविंद शाह वाल्को, तुलाराम पिस्दा, संतराम छेदैहा, नोहरू कुमेटी, चन्द्रशेखर मंडलोई, मनभावन सिंह उइके, मनोज नेताम, संतकुमार नेताम, संतराम सलामें, योगेन्द्र कुमेटी, करण बोगा, प्रेमलाल मंडावी, राजाराम मरकाम, मंगलू राम तुलावी आदि मौजूद रहे।













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