राजनांदगांव , क्रिटिकल केयर अस्पताल के लिए नया ट्रांसफार्मर लगाने सालभर पहले 42 लाख जमा करने के बाद भी नया ट्रांसफार्मर नहीं लग सका। अस्पताल में बिजली सप्लाई की न तो फाइनल टेस्टिंग हो सकी और न ही भवन हैंडओवर किया जा सका। फायर सेफ्टी और अस्पताल के भीतर बिजली से संबधित काम के लिए टेंडर और काम में देरी के कारण अस्पताल का काम सालभर पिछड़ गया। बिजली कंपनी और पीडब्ल्यूडी की सुस्ती के कारण अस्पताल भवन का काम अटका पड़ा है।
मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने 16.63 करोड़ की लागत से 50 बेड का पांच मंजिला क्रिटिकल केयर अस्पताल का काम जून 2023 में शुरू किया गया था। इसे जून 2025 में पूरा हो जाना था, जो सितंबर 2026 तक भी नहीं हो पाया। पहले की ड्राइंग डिजाइन में मेडिकल कॉलेज अस्पताल का पुराना और नए क्रिटिकल केयर अस्पताल भवन को कनेक्ट करने प्लानिंग नहीं थी। मरीजों को भीतर से दोनों अस्पतालों तक पहुंचाने बाद में प्लानिंग कर रैंप बना कर अब दोनों अस्पतालों को जोड़ा गया है।
मेडिकल मशीनरी के लिए नया ट्रांसफार्मर जरूरी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अतुल देशकर ने बताया कि अस्पताल में मेडिसिन, गायनिक, सर्जरी विभाग, आईसीसीयू की सुविधा रहेगी। साथ ही रैंप, 2 लिफ्ट, पार्किंग, ओटी, इमरजेंसी सेवा रहेगी। करीब 7 करोड़ खर्च कर आधुनिक उपकरण लगेंगे। ट्रांसफार्मर लगाने का काम एक-दो दिन में शुरू होने की जानकारी मिली है। ट्रांसफार्मर लगने पर बिजली सप्लाई, वोल्टेज क्षमता अनुसार लिफ्ट, मेडिकल मशीनरी, उपकरणों को इंस्टाल कर फाइनल टेस्टिंग करेंगे।
अब मरीजों की जांच और इलाज में होगी आसानी यहां मेडिसिन से संबधित जैसे तेज बुखार, डायरिया, पीलिया, टाइफाइड, मलेरिया, हादसों में घायल होकर आने वाले क्रिटिकल मरीजों का इलाज करेंगे। प्रसव पीड़ा वाली गर्भवतियों की जांच और इलाज किया जाएगा। ज़रुरत पड़ने पर मरीज की कंडिशन अनुसार मेडिकल कॉलेज में भर्ती करेंगे। नया अस्पताल बनने से रोज 700 की औसत ओपीडी वाले मेडिकल कॉलेज से दबाव कम होगा। इसका विस्तार होगा सुविधा और स्टाफ बढ़ेगा। इलाज में आसानी व भीड़ से राहत मिलेगी।
नया ट्रांसफार्मर लगाने अब भी कोई प्लानिंग तक नहीं पीडब्ल्यूडी की ईई ऋतु खरे का कहना है कि ट्रांसफार्मर लगाने राशि बिजली कंपनी को भेज दी गई है। एक-दो दिन में काम शुरू कर सप्ताहभर में पूरा करने की जानकारी मिली है। बिजली कंपनी के अफसरों का कहना है सप्ताह भर में नया ट्रांसफार्मर लग जाएगा। दोनों अस्पतालों का कनेक्शन अलग रहेगा। बिजली गुल की समस्या नहीं होगी।













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