राजनांदगांव : सूरज की किरणों ने बदली खेमचंद के घर की तस्वीर – बिजली बिल हुआ शून्य और खाते में जमा हुए 12 हजार रूपए

राजनांदगांव : सूरज की किरणों ने बदली खेमचंद के घर की तस्वीर - बिजली बिल हुआ शून्य और खाते में जमा हुए 12 हजार रूपए

– प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से मिली 1.08 लाख रूपए की सब्सिडी
– सौर ऊर्जा बनी बचत और आर्थिक लाभ का माध्यम
राजनांदगांव। जब घर की छत पर सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो अब ग्राम मुरमुंदा के सरपंच खेमचंद सोरी के लिए यह सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि बचत और आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर आती हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घर की छत पर लगाए गए 3 किलोवाट के सोलर प्लांट ने उनके परिवार की बिजली संबंधी जरूरतों को आसान कर दिया है। अब जहां पहले हर माह बिजली बिल आने का इंतजार रहता था, वहीं सौर ऊर्जा अपनाने के बाद उनका बिजली बिल शून्य आ रहा है।


डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत मुरमुंदा निवासी खेमचंद सोरी ने करीब 6 माह पहले अपने घर में 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कराया। वे बताते हैं कि उनके घर में प्रतिदिन करीब 3 से 4 यूनिट बिजली की खपत होती है, जबकि सोलर पैनल से प्रतिदिन लगभग 20 से 22 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली में से करीब 16 से 18 यूनिट प्रतिदिन ग्रिड में जमा हो रही है। सौर ऊर्जा के उत्पादन और खपत की जानकारी सोरी अपने मोबाइल एप के माध्यम से नियमित रूप से देखते हैं। इस व्यवस्था से उन्हें बिजली खर्च में राहत तो मिली ही है, साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने से उनके खाते में अब तक करीब 12 हजार रूपए की राशि जमा हो चुकी है।


1.08 लाख रूपए की सब्सिडी ने आसान किया सोलर अपनाने का रास्ता –
सरपंच खेमचंद सोरी के लिए योजना का एक महत्वपूर्ण लाभ सोलर पैनल स्थापना पर मिली सब्सिडी भी रही। उन्हें कुल 1 लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिसमें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए और राज्य सरकार से 30 हजार रूपए की सहायता शामिल है। यह आर्थिक सहायता उनके लिए सौर ऊर्जा अपनाने में महत्वपूर्ण साबित हुई। वे बताते हैं कि सोलर पैनल लगने से पहले उनके घर का बिजली बिल करीब 500 रूपए तक प्रतिमाह आता था। अब यही बिजली बिल शून्य हो गया है और अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजने से उन्हें आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि योजना के माध्यम से घर की बिजली जरूरत पूरी होने के साथ आर्थिक बचत और अतिरिक्त लाभ का अवसर मिला है।

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एक घर की पहल बनी पूरे गांव के लिए प्रेरणा –
सरपंच खेमचंद सोरी ने स्वयं सौर ऊर्जा अपनाकर जो पहल की, उसका असर अब मुरमुंदा गांव में भी दिखाई देने लगा है। ग्राम पंचायत में करीब 32 परिवार सोलर पैनल स्थापित कर योजना का लाभ ले रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर सूर्यसभा आयोजित कर ग्रामीणों को प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी दी जा रही है और उन्हें स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गांव के अन्य परिवार भी सौर ऊर्जा के लाभों को समझते हुए योजना से जुडऩे के लिए आगे आ रहे हैं। इस तरह मुरमुंदा में सौर ऊर्जा का विस्तार न केवल बिजली की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कदम है, बल्कि बिजली खर्च में बचत, अतिरिक्त बिजली से आर्थिक लाभ और पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ता सामूहिक प्रयास भी बन रहा है।


सूरज से ऊर्जा, ऊर्जा से बचत और बचत से आत्मनिर्भरता –
खेमचंद सोरी की कहानी इस बात की मिसाल है कि योजनाओं का लाभ जब लोगों के जीवन से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता। उनके घर की छत पर लगा सोलर प्लांट आज उनके परिवार के लिए बिजली का स्रोत होने के साथ-साथ बचत, आर्थिक लाभ और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन चुका है। मुरमुंदा में सौर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम यह संदेश दे रहे हैं कि सूरज की रोशनी को ऊर्जा में बदलकर बिजली खर्च कम किया जा सकता है और अतिरिक्त ऊर्जा को आर्थिक लाभ में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में गांव लगातार आगे बढ़ रहा है।

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