रायपुर। छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों के पुनर्वास और कल्याण से जुड़ी संस्थाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने की बात सामने आ रही है। इस मामले में शुरुआत में करीब 1000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, जांच के दौरान दोनों संस्थाओं के वास्तविक खर्च का आंकड़ा करीब 35 से 40 करोड़ रुपये के आसपास होने की चर्चा है। अब माना जा रहा है कि सीबीआई जल्द ही इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। यह पूरा मामला समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (PRRC) से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने इन दोनों संस्थाओं से जुड़े करीब 30 अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। जांच के दौरान खास तौर पर कर्मचारियों की नियुक्ति, उनकी वास्तविक मौजूदगी, कामकाज और वेतन के भुगतान से संबंधित बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई।
मामले की जांच के सिलसिले में पिछले साल अक्टूबर में सीबीआई की टीम ने रायपुर के माना स्थित SRC और PRRC में दबिश दी थी। इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य संबंधित सामग्री जब्त की थी। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के सचिव से भी पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह मामला कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर की याचिका के बाद हाईकोर्ट के निर्देश से सीबीआई तक पहुंचा। अदालत के निर्देश के बाद जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू की। एफआईआर में आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए थे।
संस्थाओं के गठन और संचालन की प्रक्रिया से जुड़े रहे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए थे। इनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, एमके राऊत, बीएल अग्रवाल और पीपी श्रोती सहित अन्य अधिकारियों के नाम सामने आए थे। हालांकि, इन अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम स्थिति सीबीआई की जांच रिपोर्ट और संभावित आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2004 से 2018 के बीच SRC और PRRC में हुआ कुल खर्च करीब 35 से 40 करोड़ रुपये के आसपास पाया गया है। यह शुरुआती आरोपों में बताए गए करीब 1000 करोड़ रुपये के आंकड़े से काफी कम है। हालांकि, जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों के वेतन भुगतान और राशि आहरण से जुड़ी अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि इन मामलों में दो से तीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर जिम्मेदारी तय किए जाने पर जांच आगे बढ़ी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम आरोप पत्र में किन-किन लोगों को आरोपी बनाया जाएगा और एजेंसी किस स्तर की वित्तीय अनियमितता को प्रमाणित मानती है। इस मामले में राज्य स्तर पर की गई जांच में भी वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में किया गया था। अदालत के समक्ष यह आरोप भी रखा गया था कि PRRC में अपेक्षित स्तर पर वास्तविक गतिविधियां संचालित नहीं हो रही थीं और कर्मचारियों के नाम पर राशि निकाले जाने की शिकायतें सामने आई थीं। अब सीबीआई की जांच पूरी होने की खबर के बाद संभावित आरोप पत्र पर सबकी नजर है। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जांच एजेंसी ने किन आरोपों को प्रमाणित माना, कितनी वित्तीय अनियमितता सामने आई और मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी तय की गई है।









Leave a Reply