रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत नौ दिवसीय शाश्वत नवपद ओली की आराधना जारी है। मंगलवार को तीसरे दिन आचार्य पद की आराधना की गई। मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा की निश्रा में आयोजित धर्मसभा में मुनि ने आचार्य पद की महत्ता बताई। साथ ही मयनासुंदरी के चारित्र्य का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
मुनि ने कहा कि हर व्यक्ति सफलता और सुख-सुविधाएं चाहता है, लेकिन इसके लिए कितना और किस दिशा में पुरुषार्थ करना चाहिए, इस पर विचार जरूरी है। जीवन में तीन तरह से उपलब्धि मिल सकती है। बिना पुरुषार्थ के, गलत दिशा में पुरुषार्थ करके और तीसरा धर्म के मार्ग पर चलते हुए सही पुरुषार्थ से। आज जो कुछ भी प्राप्त हो रहा है, वह पुण्य और धर्म के प्रभाव से है। इसलिए इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
मुनि ने कहा कि व्यक्ति वास्तविकता को सही रूप में स्वीकार नहीं करता, इसलिए आत्मचिंतन की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाता। जीवन में मिलने वाले सुख-दुख और परिस्थितियां पुण्य-पाप कर्मों के उदय से जुड़ी होती हैं। सद्बुद्धि के अभाव में व्यक्ति गलत दिशा में पुरुषार्थ करता है, जिससे नए कर्मों का बंधन होता है। वास्तविकता को नहीं समझने पर कर्मों का बंधन व्यक्ति को जकड़ लेता है।
27 अक्टूबर को होगा तप का पारणा
चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि नवपद ओली की आराधना में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल होकर जिनवाणी का श्रवण कर रहे हैं। आराधना के दौरान 80 श्रावक-श्राविकाएं आयंबिल तप कर रहे हैं। तप का सामूहिक पारणा 27 अक्टूबर को रत्नप्रभुसूरीश्वर भवन में होगा।












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