गरियाबंद। जिले में विद्युत पोल शिफ्टिंग के कार्य में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। नेशनल हाईवे 130 सी पर पाण्डुका के पास ऊंचे बिजली के पोल पर श्रमिक बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम करते नजर आए। न श्रमिकों के सिर पर हेलमेट दिखाई दिया और न ही ऊंचाई पर काम करने के लिए सेफ्टी बेल्ट जैसी अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था नजर आई। ऐसे में विद्युत पोल शिफ्टिंग का कार्य श्रमिकों की सुरक्षा के बजाय उनकी जोखिम भरी मेहनत के भरोसे होता दिखाई दे रहा है।
ऊंचाई पर काम, सुरक्षा व्यवस्था नदारद
विद्युत पोल शिफ्टिंग का कार्य अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण माना जाता है। ऊंचाई पर बिजली के खंभों में काम करने के दौरान सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और प्रशिक्षित कर्मचारियों की निगरानी बेहद आवश्यक होती है, लेकिन पाण्डुका के पास नेशनल हाईवे 130 सी के किनारे चल रहे कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं।
श्रमिक ऊंचे विद्युत पोल पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं, मौके पर विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर की मौजूदगी भी नहीं बताई जा रही है।
ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
विद्युत पोल शिफ्टिंग का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। ऐसे में श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर काम कर रहे हैं, तो यह ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नेशनल हाईवे के किनारे विद्युत कार्य होने के कारण स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है। यहां श्रमिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आवश्यक सावधानियों का पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
अधिकारी बोले- ठेकेदार को जारी होगा नोटिस
मामले को लेकर विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता हेमंत ठाकुर ने कहा कि ठेकेदारों को हमेशा निर्देशित किया जाता है कि विद्युत कार्य के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। यदि संबंधित ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो उसके विरुद्ध नोटिस जारी किया जाएगा।
कार्रवाई होगी या केवल नोटिस तक सीमित रहेगा मामला?
इस घटना ने विद्युत विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ठेकेदार द्वारा श्रमिकों को बिना सुरक्षा उपकरणों के काम पर कैसे लगाया गया? क्या कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस लापरवाही की जानकारी नहीं थी?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करेगा, या श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई भी करेगा?
श्रमिकों की सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया गया, तो ऐसी लापरवाही गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है।















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