डॉक्टर को अनिवार्य ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नियुक्ति नहीं देना सरकार की गलती- हाईकोर्ट

जबलपुर
 मध्यप्रदेश में मेडिकल पीजी परीक्षा पास होने के बाद भी एक डॉक्टर को तीन महीने की अनिवार्य ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नियुक्ति नहीं दी गई। मप्र हाईकोर्ट ने इसे सरकार की गलती मानते हुए एमजी मेडिकल कॉलेज इंदौर को डॉक्टर के मूल दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया है।

जस्टिस सुजय पॉल व जस्टिस डीडी बंसल की डबल बेंच में ये मामला आया था। कोर्ट ने 45 दिन के अंदर याचिकाकर्ता डॉक्टर को उसके मूल दस्तावेज वापस लौटाने का आदेश दिया है। ये याचिका डॉ. अर्चना गोविंद राव भांगे ने दायर की थी। 2015 में उन्होंने एमजी मेडिकल कॉलेज इंदौर में मेडिकल पीजी कोर्स के लिए प्रवेश लिया। नियमानुसार प्रवेश के समय उनसे बांड भराया गया कि पीजी कोर्स पूरा होने पर एक साल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देनी होंगी।

याचिकाकर्ता का रिजल्ट 17 सितंबर 2018 को आया। इसमें उसे पूरक मिली, लेकिन सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में सेवा के लिए उसका नियुक्ति पत्र जारी कर दिया। याचिकाकर्ता ने 31 दिसम्बर 2018 को पूरक की परीक्षा पास की। बावजूद कई आवेदन पर भी उसे ग्रामीण क्षेत्र में सेवा का नियुक्ति पत्र नहीं मिला। इसी दौरान पुणे में उसे रैजिडैंट डॉक्टर की नौकरी मिल गई। वहां मूल दस्तावेजों को जमा करना है।

मूल दस्तावेज मेडिकल कॉलेज में जमा
दरअसल याचिकाकर्ता के डॉक्यूमेंट कॉलेज में जमा है वहां तर्क दिया गया कि तीन महीने की अनिवार्य ग्रामीण क्षेत्र में सेवा न करने पर उसका बांड स्वयमेव समाप्त हो गया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस कर जवाब मांगा था। सरकार की ओर से बताया गया कि कॉलेज के डीन ने पीजी परीक्षा पास न होने की सूचना नहीं दी थी। इस कारण नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ। कोर्ट ने इस पर आवेदक को उसके मूल दस्तावेज लौटाने का आदेश देते हुए कहा कि इसमें आवेदक की कोई गलती नहीं है।

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