कांकेर। आज कांकेर के कोयलीबेडा से महाराष्ट्र तक रात के समय भी सुरक्षित सफर किया जा सकता है जो कि सुरक्षा बलों और सरकार की लगातार मेहनत का नतीजा है। इस सफलता के पीछे केंद्र और राज्य सरकार के सतत प्रयास हैं जिनमें नक्सली प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कैंप की स्थापना, स्थानीय ग्रामीणों से सामंजस्य बनाना और सड़क तथा कनेक्टिविटी के बेहतर विकास शामिल हैं। इन प्रयासों ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की राह आसान कर दी है और नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर किया है।

केंद्रीय गृह मंत्री की 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन के तहत कांकेर से अभियान की शुरुआत हुई। पिछले डेढ़ साल में यहां 45 नक्सलियों के एनकाउंटर हुए हैं जिनमें से 27 बड़े कैडर के नक्सली भी शामिल हैं। इसके अलावा 18 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कांकेर क्षेत्र में हड़कोर नक्सली प्रभाकर और उसकी पत्नी जैसी कुख्यात नक्सली भी गिरफ्तार की जा चुकी हैं।

सुरक्षा बलों की इन कार्रवाइयों से नक्सली अब पूरी तरह से बैकफुट पर हैं। साथ ही पखांजूर से महाराष्ट्र तक सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है जिससे ग्रामीणों की यात्रा दूरी में करीब 100 किलोमीटर की कटौती हुई है। यह सड़क परियोजना ग्रामीणों के जीवन को सरल और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो रही है। सरकार की योजनाएं जैसे राव घाट परियोजना भी तेजी से प्रगति पर हैं साथ ही रेलवे लाइन का विस्तार भी किया गया है जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हो रही है। कांकेर पुलिस अधीक्षक भी मानते हैं कि नक्सलियों को काफी नुकसान पहुंचाया गया है और अभियान इसी प्रकार जारी रहेगा।

By kgnews

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