भिलाई इस्पात प्लांट में एक बार फिर सीआईएसएफ के जवान भागते हुए दिखाई दिए. कर्मचारी गिरे हुए थे. एम्बुलेंस पहुंची और घायलों को अस्पताल ले गई. ये देखकर हर कोई हैरान हो गया. आए दिन होने वाले हादसों के बारे में सुनकर सभी यहीं सोचने लगे कि एक बार फिर बीएसपी में बड़ा एक्सीडेंट हो गया है.
दिसंबर के महीने में गैस रिसाव के बाद बीएसपी में बड़ी आगजनी की घटना हुई थी. इसी से सबक लेते हुए एक मॉक ड्रिल की गई. सिलिकॉन स्टील मिल परिसर में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से गैस रिसाव से होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक मॉक ड्रिल की गई. आरएसपी की ऑनसाइट आपदा प्रबंधन प्रणाली और उससे जुड़े कर्मियों की प्रभावकारिता का आंकलन करने के लिए किया गया था. कर्मचारियों के पूरे दल को 3 समूहों में बांटा गया था. लड़ाकू दल, बचाव दल और सहायक दल. 79 कर्मियों वाली सीआईएसएफ टीम ने पूरे अभ्यास के दौरान क्षेत्र की घेराबंदी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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