दुर्ग । पंचायती राज दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, पाहंदा (अ), दुर्ग द्वारा आज 24 अप्रैल को पाटन विकासखंड के दो ग्राम पंचायतों खम्हरिया एवं पाहंदा (अ) में संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिक मनीष कुमार वर्मा ने खाद की कमी होने पर घबराने के बजाय आगामी खरीफ सीजन में धान की खेती के लिए विकल्प सुझाए। उन्होंने बताया कि किसान पारम्परिक खाद के जगह नैनों यूरिया, नैनो डी.ए.पी, नील हरित काई, पी.एस.बी., के.एस.बी. जेड.एस.बी., एजोस्पाईरिलम का उपयोग कर सकते है। इससे न केवल खेती की लागत कम होगी बल्कि लाभ भी बढ़ेगा।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. ललिता रामटेके ने बताया कि असंतुलित मात्रा में खाद डालने से केवल फसल का उत्पादन ही प्रभावित नहीं होता बल्कि हमारी मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी लगातार घट रही है। उन्होंने मिट्टी की जॉच करवाने और जैविक रासायनिक खाद दोनों को संतुलित रूप में उपयोग करने पर जोर दिया। साथ ही साथ मिट्टी को सेहतमंद बनाने के लिए केचुऑ खाद, हरी खाद, एजोला बनाने की विधि के बारे में किसानों को विस्तार से बताया। इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायत खम्हारिया की सरपंच सोनिया यदु एवं पाहंदा (अ) की सरपंच ईसरावती ठाकुर, सचिव एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित थे।
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