विकासखंड के ग्राम नीचेकोहड़ा में 15 दिनों के अंतराल में सात लोगों का मृत्यु हो गई है। इसमें चार महिलाएं, तीन पुरुष हैं। परिवार व गांव वाले मौत का कोई ठोस कारण नहीं बता रहे हैं, केवल सामान्य सर्दी-खांसी व उल्टी दस्त की जानकारी ही लग पाई और हॉस्पिटल पहुंचते ही ग्रामीणों ने दम तोड़ दिया है। गांव में पहली मौत 28 अगस्त को हुई थी। वहीं आखिरी दो मौतें 13 सितंबर को हुई है। सात में से चार ग्रामीण राजनांदगांव व एक ग्रामीण ने सीएचसी चौकी में दम तोड़ा। वहीं दो ग्रामीणों ने गांव में ही अंतिम सांस लिय।
पीड़ित परिवार के अनुसार 23 वर्षीय रेणुका नायक 23 साल और 18 वर्षीय सती कंवर दोनों सहेली थीं, दोनों की मौत एक ही दिन हो गई। रेणुका नायक गांव से सामान्य स्थिति में स्कूटी से सफर कर चौकी अस्पताल गई थी, वहां से उन्हें राजनांदगांव रिफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं सरिता पटेल 45 साल, बिरेंद्र कुमार भूआर्य 23 साल, नंद कुमार नायक 45 साल, हट्टे राम निर्मलकर 55 साल व सूरजा बाई 70 साल की 15 दिनों के अंदर में मौत हुई है। ग्रामीणों ने विधायक मंडावी से गांव में हो रही घटना के संबंध में विस्तार से बताया, इसके बाद विधायक ने पीड़ित परिवारों के घर में जाकर मुलाकात किया व परिवारों को ढांढस बंधाया। साथ ही साथ डोर-टू-डोर दौरा कर ग्रामीणों से बातचीत की।
कौड़ीकसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आता है नीचेकोहड़ा: ग्राम नीचेकोहड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौड़ीकसा के अंतर्गत आता है। यहां के प्रभारी डॉक्टर हितेश मार्शल हैं जो कई दिनों से अस्पताल से ही गायब हैं। इससे पूर्व भी विधायक ने जब हॉस्पिटल का दौरा किया था तो वहां से भी डॉक्टर मार्शल नदारद मिले थे। जबकि उस दौरान लेड़ीजोब में डायरिया का प्रकोप चल रहा था और मरीज कौड़ीकसा सहित चौकी में एडमिट थे।
बीएमओ व सीएमएचओ दोनों घटना से हैं अनजान नीचेकोहड़ा पहुंचे विधायक ने जब स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों से घटना की जानकारी लेना चाहा तो दोनों अधिकारियों ने घटना की जानकारी से इनकार किया। इस पर विधायक ने अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने और विशेष शिविर लगाकर डोर-टू-डोर सर्वे करने निर्देश दिया। जबकि 15 दिनों के अंदर सात मौतें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से हुई हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अनजान है।
अलग-अलग कारणों से मौत हुई है: बीएमओ अंबागढ़ चौकी बीएमओ डॉ आर आर धुर्वे ने बताया कि 15 मई से अब तक लोगांे की अलग-अलग कारणों सहित नेचुरल मौतें हुई है। वर्तमान में गांव में कोई उल्टी-दस्त का मरीज नहीं है, फिर भी एहतियात के लिए गांव में आरएचओ, एएमएन की ड्यूटी लगाई गई है। समय-समय पर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
