धार
अब अगर आप एआई से निमाड़ी में सवाल पूछेंगे, तो जवाब भी उसी बोली में मिलेगा। यह सपना अब साकार हो रहा है। केंद्र सरकार ने देश की भाषायी विविधता को तकनीक से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार किया है, जिसका नाम है 'भारत जेन (Bharat Jain)'। हाल ही में इसे लॉन्च किया गया है और यह मॉडल खासतौर पर भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों को समझने और उनके अनुरूप जवाब देने में सक्षम है।
भारत जेन को आईआईटी मुंबई ने विकसित किया है और इसमें देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं, जिनमें आईआईएम इंदौर (IIM Indore) भी एक प्रमुख भागीदार है। अब इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की निमाड़ी बोली को एआई में शामिल करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह कदम भाषायी समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
भारत जेन परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रतीक जोशी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के दूरदराज और जनजातीय अंचलों में रहने वाले लोग भी तकनीक से जुड़ सकें, चाहे उन्हें अंग्रेज़ी या हिंदी न भी आती हो। इसके लिए भारत जेन को लोकभाषाओं और बोलियों को समझने योग्य बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आबादी भी इसका लाभ उठा सके।
परियोजना की शुरुआत धार जिले के खलघाट से की गई है, जहां निमाड़ी भाषा को आधार बनाकर AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षकों, और बोलियों के जानकारों से संवाद स्थापित किया गया है। बोलचाल की शैली, मुहावरे और सांस्कृतिक संदर्भों को एआई के डेटा में शामिल किया जा रहा है, ताकि जवाब न केवल सही बल्कि संदर्भपूर्ण भी हों।
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