भोपाल
मध्यप्रदेश में अब स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। लोक शिक्षण संस्थान विभाग के नए निर्देश के मुताबिक यदि कोई शिक्षक लगातार 7 दिन तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सेवा सीधे समाप्त की जा सकती है। इस फैसले ने शिक्षा महकमे में हलचल मचा दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने दो टूक कहा कि विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है। “हर सिस्टम की अपनी मर्यादा होती है। अगर शिक्षक ही जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?” मंत्री ने साफ कर दिया कि शिक्षा व्यवस्था में ढिलाई या मनमानी अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
क्या है नया आदेश?
क्यों लिया गया फैसला?
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों से शिक्षकों की लगातार गैरहाजिरी की शिकायतें मिल रही थीं। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही थी। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।सख्ती या सख्त संदेश?मंत्री राव उदय प्रताप ने कहा कि यह कदम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए है। “बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। जो जिम्मेदारी निभाएगा, उसे पूरा सम्मान मिलेगा; लेकिन लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि इस सख्त आदेश के बाद शिक्षा व्यवस्था में कितना सुधार आता है और गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है ड्यूटी से गायब रहना अब महंगा पड़ेगा।
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