धार
 कोरोना महामारी ने लोगों के जीवन में कई ऐसे दुख दिए हैं, जो कभी नहीं भुलाए जा सकेंगे। इसमें अपना बहुत कुछ खो देने वाले लोग दूसरों की खुशियों के लिए अनुकरणीय कदम उठा रहे हैं। धार शहर के प्रकाश नगर निवासी भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी युग प्रकाश तिवारी और उनकी पत्नी रागिनी तिवारी ने विधवा बहू का अक्षय तृतीया पर पुनर्विवाह किया। खुद माता-पिता बनकर बहू को गृहस्थ जीवन में प्रवेश करवाया। उन्होंने बहू को बेटी मानते विवाह किया। इतना ही नहीं नागपुर में विवाह संपन्न करवाने के बाद करीब एक सप्ताह तक वहां पर उनके गृहस्थ जीवन में प्रवेश में सहयोग किया।

जहां एक और कोरोना संक्रमण काल में कई परिवारों में बेटों के निधन हो जाने के बाद में बहू को घर से बाहर निकाल दिए जाने या बहू को आर्थिक रूप से मदद नहीं करने सहित अन्य कई शिकायतें आ रही है। वहीं धार के तिवारी परिवार में अनुकरणीय पहल की है। दरअसल युग प्रकाश तिवारी के इंजीनियर पुत्र प्रियंक तिवारी उर्फ मिंटू का 25 अप्रैल 2021 को कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आनेे के कारण भोपाल में निधन हो गया था।

प्रियंक तिवारी 34 साल थे। परिवार पर विपदा का पहाड़ टूट पड़ा था। प्रियंक भोपाल में ही पदस्थ थे। वहां संक्रमण होने के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। ऐसे में बहू को बेटी मानने वाले इस परिवार को अपनी बहू व नौ साल की बेटी के आगामी जीवन की चिंता थी। तिवारी परिवार ने एक साल बाद अपनी बहू का पुनर्विवाह किया।

उन्‍होंने बाकायदा वर की तलाश की और योग्य वर तलाश करने के बाद अक्षय तृतीया पर नागपुर जाकर विवाह करवाया। सास व ससुर ने माता व पिता बनकर विवाह किया। इतना ही नहीं तिवारी परिवार ने अपनी बेटी के पुन: विवाह के समय होने वाली हर रस्म व कन्यादान खुद किया। विवाह का खर्च भी स्वयं उठाया। साथ ही नागपुर में उनके पुत्र प्रियंक ने जो बंगला खरीदा था। वह बंगला भी बेटी स्वरूपा बहू को दे दिया। युगप्रकाश तिवारी ने बताया यदि बहू को बेटी मानते हैं तो उसके जीचन की हर पल की खुशाी के लिए ऐसे कदम उठाने चाहिए।

By kgnews

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