इंदौर
मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव के नाम का ऐलान हो गया है। इसके साथ ही डिप्टी सीएम के नाम का भी एलान कर दिया गया है। जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को एमपी का डिप्टी सीएम बनाया है। नए नाम का ऐलान कर बीजेपी ने एक बार फिर से सभी को चौंकाया है, लेकिन सीएम की रेस में शामिल रहे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर विधानसभा क्रमांक एक से विधायक कैलाश विजयवर्गीय का अब क्या होगा? इसको लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।
दरअसल, इंदौर की जनता उन्हें मुख्यमंत्री के रुप में देखना चाह रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में अब कैलाश विजयवर्गीय मोहन यादव के मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या नहीं, ये भी बड़ा सवाल है। ऐसा माना जा रहा है कि मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनने के बाद कैलाश विजयवर्गीय की ताकत बढ़ेगी। क्योंकि मोहन यादव को सीएम बनाने में आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। मोहन यादव को कैलाश विजयवर्गीय के करीबी के तौर पर देखा जाता है। ये भी माना जा रहा है कि उन्हीं की पैरवी पर उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है।
आपको बता दें, मुख्यमंत्री की रेस में कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और शिवराज सिंह चौहान सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया कि संगठन अब नई लीडरशीप प्रदेश में तैयार करना चाहती है।
2024 में लोकसभा चुनाव होना है। माना जा रहा है कि तीनों दिग्गजों का उपयोग लोकसभा चुनाव में किया जाएगा। पार्टी तीनों को अन्य राज्यों की चुनावी जिम्मेदारी दे सकती है। कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल पूर्व में भी दूसरे प्रदेशों के प्रभारी रह चुके है।
शिवराज को केंद्र में मिल सकती है जिम्मेदारी
निर्वतमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बतौर मुख्यमंत्री लंबी पारी खेली, लेकिन संगठन अब उन्हें केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है। केंद्रीय मंत्रीमंडल में उन्हें शामिल किया जा सकता है या फिर संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल सकता है।
विजयवर्गीय प्रदेशाध्यक्ष बन सकते है
कैलाश विजयवर्गीय मुख्यमंत्री तो नहीं बन पाए, लेकिन वे प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण पद के लिए भी प्रयास कर सकते है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन उन्हें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बना सकता है, या फिर मालवा निमाड़ की अनारक्षित सीटों से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार भी बना सकता है।
पटेल का उपयोग संगठन में
प्रहलाद पटेल केंद्र सरकार में मंत्री रहे है, लेकिन अब केंद्र सरकार का कार्यकाल भी कुछ महीनों का है। इस स्थिति में प्रहलाद पटेल को भी शीर्ष नेतृत्व नई भूमिका दे सकता है। उन्हें संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है। इसके अलावा छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र पर भी फोकस करने को कहा जा सकता है,क्योकि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र को छोड़कर शेष 29 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। विधानसभा चुनाव में भी इस जिले में भाजपा खाता नहीं खोल पाई।
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