राजनांदगांव, जिले के 400 गांवों की लगभग 50 हजार से ज्यादा महिलाओं ने पानी बचाने कदम उठाया है। तेज धूप और भीषण गर्मी में महिलाएं गांव में बोरी बंधन कर रही ताकि बारिश के पानी को स्टोर किया जा सके। अब गांव के भू.जल स्तर में सुधार होता जा रहा है। बीती गर्मी में कई गांव जल संकट के दौर से गुजर थे। भू.जल स्तर कई फीट नीचे चला गया। इससे बोर और हैंडपंप से पानी आना बंद हो गया। गंभीर स्थिति को देख समूह की कुछ महिलाओं ने बारिश का पानी बचाने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने कुछ पुरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया।
गांव के जिन नालों से बारिश में पानी फिजूल बह रहा थाए वहां सीमेंट की खाली बोरियों में रेत भरकर बोरी बंधन बनाया। ताकि पानी को अधिक से अधिक िहस्से में स्टोर किया जा सके। महिला समूह ने अपने आस.पास के गांव में इसके लिए दूसरी महिलाओं को जागरुक करने प्रयास किया। जिले के करीब 400 गांव में अभियान ने व्यापक रुप लिया। करीब 50 हजार महिलाएं स्वस्फूर्त अभियान का हिस्सा बनी और गांव.गांव में बारिश का पानी बचाने और भू.जल स्तर को बेहतर बनाने के लिए बोरी बंधान का कार्य शुरू कर दिया गया।
सेमी क्रिटिकल जोन में आए थे जिले के कई गांव केंद्रीय जल बोर्ड की टीम ने जिले के 3 ब्लॉक राजनांदगांव डोंगरगांव और डोंगरगढ़ को वाटर लेवल के लिहाज से सेमी क्रिटिकल जोन घोषित किया था। यहां वाटर लेवल में तेजी से गिरावट हुई है। जिससे गर्मी में कई गांव में पानी की समस्या खड़ी हो गई वहीं तालाब भी सूख गए। आने वाले सालों में समस्या और भयानक रुप ले सकती थी। जिसे देख महिला समूह की सदस्यों ने बारिश में पानी बचाने यह महा अभियान शुरु किया। 50 हजार से अधिक महिलाएं जुट गई।
गांवों में बने मकानों में हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी महिला समूह की सदस्यों ने पानी बचाने जागरुकता अभियान चलाया। गांवों में यात्रा निकालकर जल संकट की जानकारी दी। संरक्षण के तकनीकों को समझाया गांवों में बनने वाले मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता को समझाया गया। गांव के जल स्रोतों को संरक्षित करने महिलाएं जुट गई। बारिश आने के पहले ही गांव.गांव में बोरी बंधन सोख्ता गड्ढा वाटर रिचार्ज सिस्टम के पारंपरिक तरीकों को अपनाया। बारिश का पानी अब फिजूल नहीं बह रहा।
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