राजनांदगांव , महाकाल सेना भक्त मंडल ने सावन सोमवार की भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल पालकी यात्रा की तैयारी को लेकर माहेश्वरी भवन में बैठक आयोजित की। यात्रा को भव्य, अनुशासित और आध्यात्मिक स्वरूप देने के लिए मार्ग, सुरक्षा, स्वच्छता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनभागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बार भी सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। डीजे का उपयोग नहीं होगा, जबकि स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक गेड़ी नृत्य को विशेष स्थान दिया जाएगा।
महाकाल सेना भक्त मंडल की बैठक में तय किया गया कि इस वर्ष सावन माह में भगवान चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी यात्रा उज्जैन महाकाल की तर्ज पर निकाली जाएगी। श्रद्धालुओं ने यात्रा को शहर की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान अनुरूप भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया। बैठक में यात्रा मार्ग, सुरक्षा, यातायात, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता एवं धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सुझाव लिए गए। बैठक के दौरान पदाधिकारी सदस्यों ने बारी-बारी से अपने सुझाव दिए, इसमें विचार विमर्श किया गया।
दोपहर 1 बजे नंदई से निकलेगी पालकी यात्रा समिति के सदस्यों ने बताया कि राजनांदगांव सहित डोंगरगांव, खैरागढ़, पार्रीकला, बोदेला सहित 12 स्थानों पर महाकाल पालकी यात्राएं आयोजित होगी। राजनांदगांव में प्रथम पालकी यात्रा 3 अगस्त को दोपहर 1 बजे नंदई से प्रारंभ होकर इंदिरा नगर चौक, बासपाई पारा, दुर्गा चौक, गांधी चौक, महाकाल चौक, आजाद चौक, गुड़ाखू लाइन और गोल बाजार, महालक्ष्मी मंदिर होते हुए हमाल पारा पहुंचेगी। पूरे मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आरती, पुष्पवर्षा और स्वागत किया जाएगा।
गेड़ी नृत्य प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेगा यात्रा प्रमुख पवन डागा ने बताया कि डीजे का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति, पारंपरिक वाद्य यंत्र और छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध गेड़ी नृत्य यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहेगा। पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा ने पालकी उठाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य रखने का सुझाव दिया, पूर्व महापौर हेमा देशमुख ने यात्रा मार्ग पर प्रकाश, पेयजल और यात्रा समाप्ति के बाद तत्काल सफाई व्यवस्था करने पर जोर दिया।













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