CG : सेंट्रल जेल में मौत : CBI ने दर्ज किया हत्या का केस, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI कर रही जांच…

CG : सेंट्रल जेल में मौत : CBI ने दर्ज किया हत्या का केस, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI कर रही जांच…

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के मौत के रहस्य से अब पर्दा उठेगा। शीर्ष अदालत के निर्देश पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। परिजनों के बयान, मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों की गहन छानबीन के बाद सीबीआई ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में परिजनों के बयान और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद CBI ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर से पहले रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

पत्नी ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने ये दिया बयान

श्रवण की पत्नी लहरा बाई सूर्यवंशी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान में जानकारी दी थी, घटना वाले दिन सीपत थाने के पुलिसकर्मी उनके पति को ग्राम मोहरा से अपने साथ ले गए थे। इसके बाद फोन पर सीधे उनके CIMS में भर्ती होने की सूचना मिली। अगले दिन मौत की खबर आ गई। परिजनों को उनसे मिलने तक नहीं दिया गया।

पिता का आरोप, बेटे को कस्टडी में रखकर 36 घंटे तक बेरहमी के साथ पीटा

पिता अमृतलाल सूर्यवंशी के अनुसार, 18 जनवरी की शाम करीब 6:30 बजे पुलिस, श्रवण (35) को शराब के कथित मामले में पकड़कर ले गई थी। 21 जनवरी की रात परिजनों को बताया गया कि उसे जेल से सिम्स भेजा गया है। अगली सुबह करीब 6 बजे उसकी मौत की पुष्टि हुई। पिता का आरोप है कि हिरासत में श्रवण को 36 घंटे तक बेरहमी से पीटा गया।

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ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट: सिर पर गंभीर चोट की वजह से कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट से मौत

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, श्रवण के शरीर में किसी तरह का रासायनिक जहर नहीं मिला। मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट में सिर पर आई गंभीर चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के माेहरा में रहने वाले श्रवण सूर्यवंशी(34) को आबकारी एक्ट के मामले में सीपत पुलिस ने गिरफ्तार किया था। श्रवण 19 जनवरी 2024 से केंद्रीय जेल में बंद था। जेल में तबीयत बिगड़ने पर 21 जनवरी 2024 को उसे सिम्स अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान 22 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई थी।

मामले की न्यायिक जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने की। 22 जुलाई 2024 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पोस्टमार्टम, एफएसएल, हिस्टोपैथोलाजी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष दिया गया कि श्रवण की मृत्यु सिर में आई गंभीर चोट और उसकी जटिलताओं के कारण हुई। रिपोर्ट में चोट किसी कठोर एवं भोथरी वस्तु से लगना संभावित बताया गया।

मजिस्ट्रेट जांच में यह सब

मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने हत्या का अपराध दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायिक जांच के दौरान मृतक के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। परिजनों ने मौत के कारण की जानकारी नहीं होने की बात कही, जबकि इलाज के दस्तावेजों और न्यायिक जांच रिपोर्ट को हत्या का मामला दर्ज करने का प्रमुख आधार माना गया। इस आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इधर हिरासत में मौत के मामले में परिजनों ने मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में आवेदन किया।

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बाद में परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है। शुक्रवार को सीबीआई की टीम सिविल लाइन थाने पहुंची। टीम ने मामले की केस डायरी और मजिस्ट्रेट जांच प्रतिवेदन की कापी का अवलोकन किया है। जल्द ही सीबीआई की टीम केस डायरी लेकर इस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है। एएसपी सिटी बिलासपुर पंकज पटेल ने बताया, हिरासत में मौत के मामले में जांच के लिए सीबीआई की टीम सिविल लाइन थाने पहुंची थी। टीम को केस डायरी सौंप दी गई है। अब आगे की जांच सीबीआई कर रही है।

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