बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोप से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल शादी नहीं होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी ने शुरुआत से ही झूठा वादा किया था या उसकी मंशा धोखाधड़ी करने की थी। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में यह साबित करना जरूरी है कि शादी का वादा करते समय आरोपी की नीयत पहले से ही उसे पूरा न करने की थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही निवासी राहुल कुमार साहू से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। मामले में शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि राहुल ने उससे शादी करने का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए थे। महिला के अनुसार, दोनों की मुलाकात विभागीय बैठकों के दौरान हुई थी और बाद में उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि राहुल ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए, लेकिन बाद में अंतरजातीय विवाह के कारण परिवार के विरोध के चलते शादी से पीछे हट गया। इस आधार पर कटघोरा थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ रही थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने मामले की एक महत्वपूर्ण परिस्थिति सामने आई। कोर्ट को बताया गया कि राहुल ने बाद में शिकायतकर्ता महिला से शादी कर ली है। शिकायतकर्ता ने भी अदालत के समक्ष आपराधिक कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पूरे मामले का मूल्यांकन किया। खंडपीठ ने कहा कि बाद में शादी नहीं होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि शादी का वादा शुरुआत से ही झूठा था। अभियोजन पक्ष को यह दिखाना आवश्यक है कि वादा करते समय आरोपी की मंशा शादी करने की थी ही नहीं और उसने केवल शिकायतकर्ता को संबंध बनाने के लिए बहलाया था। यदि शुरुआत में ऐसा धोखाधड़ीपूर्ण इरादा साबित नहीं होता, तो केवल बाद की परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक मामला कायम नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला मामले में सामने आए विशेष तथ्यों और परिस्थितियों तक सीमित है। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अलग-अलग तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। मामले में आरोपी और शिकायतकर्ता के बाद में विवाह करने तथा महिला की ओर से आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने की इच्छा को भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण परिस्थिति माना। इन सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कटघोरा थाने में दर्ज एफआईआर, पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।














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