बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के रिटायरमेंट से ठीक पहले 20 कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति का आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले 19 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भृत्य के पद पर नियुक्त किया गया है। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने 25 अगस्त को नियुक्ति आदेश जारी किया। सभी नियुक्तियां तीन वर्ष की परिवीक्षावधि के अधीन रहेंगी।
हाई कोर्ट ने कोर्ट मैनेजर और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों के रिक्त पदों के लिए कुछ महीने पहले आवेदन आमंत्रित किए थे। प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद पात्र अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में सफल उम्मीदवारों की चयन सूची जारी होने के बाद अब नियुक्ति आदेश जारी किया गया है।
20 कोर्ट मैनेजरों की अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग
जारी आदेश के अनुसार, अंकित कुमार झा को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में कोर्ट मैनेजर के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं अन्य चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश के अलग-अलग जिला न्यायालयों में जिम्मेदारी दी गई है।
उदयन दुबे को दुर्ग, संयोगिता सिंह को कमर्शियल कोर्ट रायपुर, रमाकांत पटेल को अंबिकापुर, विरज कुमार देवांगन को कोरबा, राहुल वर्मा को कोरिया, अभिजीत रथ को महासमुंद, प्रवीण कुमार को रामानुजगंज, आशुतोष कुमार को बेमेतरा, निधि नागवंशी को बिलासपुर और ऋचा पाठक को धमतरी जिला न्यायालय में पदस्थ किया गया है।
इसी तरह विजय कुमार साहू को कवर्धा, मनोज कुमार सिंह को रायपुर, प्रतिभा लकड़ा को कांकेर, बाम्पी दुबे को राजनांदगांव, कोमल भोई को जगदलपुर, शैलेन्द्र सिंह भास्कर को दंतेवाड़ा, कमलेश कुमार गोरकर को कोंडागांव, देवेंद्र भगत को सूरजपुर और गोपाल सिंह नेताम को जशपुर जिला न्यायालय में कोर्ट मैनेजर बनाया गया है।
19 भृत्य पदों पर भी नियुक्ति
आकस्मिकता निधि से भर्ती किए जाने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के रिक्त पदों के लिए 19 अभ्यर्थियों को भृत्य के पद पर नियुक्ति दी गई है। चयनित उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। नियुक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
तीन साल की परिवीक्षा, कई शर्तें लागू
नियुक्त किए गए कोर्ट मैनेजरों के लिए तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि निर्धारित की गई है। यदि कोई अभ्यर्थी परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी नहीं करता है तो इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। स्थायी नियुक्ति होने तक कर्मचारी परिवीक्षा पर ही माने जाएंगे।
परिवीक्षा के दौरान सेवाएं बिना कारण बताए समाप्त की जा सकती हैं। कर्मचारी स्वयं सेवा छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें एक महीने की पूर्व सूचना देनी होगी अथवा इसके बदले एक महीने का वेतन जमा करना होगा। इसी तरह नियोक्ता की ओर से सेवा समाप्त किए जाने पर भी एक महीने की सूचना या उसके बदले एक महीने का वेतन देने का प्रावधान रखा गया है।
3 सितंबर तक ज्वाइन करना अनिवार्य
चयनित कोर्ट मैनेजरों को 3 सितंबर 2026 तक अपने निर्धारित पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा। निर्धारित समय सीमा में ज्वाइन नहीं करने और अतिरिक्त समय की अनुमति नहीं मिलने पर नियुक्ति के लिए उनकी पात्रता समाप्त की जा सकती है।
कार्यभार ग्रहण करते समय मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और शैक्षणिक एवं अन्य प्रमाण पत्रों की मूल प्रतियां प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। पुलिस सत्यापन या चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रतिकूल पाए जाने की स्थिति में नियुक्ति आदेश निरस्त किया जा सकता है।
नियुक्ति कई कानूनी मामलों के अंतिम फैसले के अधीन
नियुक्ति आदेश में स्पष्ट किया गया है कि चयनित अभ्यर्थी हाई कोर्ट की सेवा अवधि में किसी अन्य विभाग में किसी पद के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकेंगे। बिना पूर्व अनुमति के विद्यालय या महाविद्यालय में अध्ययन करने अथवा परीक्षा में शामिल होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
नियुक्ति को अनन्तिम (Provisional) रखा गया है और जाति एवं जनजाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन भी कराया जाएगा। प्रमाण पत्रों में गलत जानकारी सामने आने पर सेवा समाप्त करने के साथ संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित S.L.P. (C) No. 19668/2022 तथा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में विचाराधीन WPS 4341/2026, WPS 4488/2026, WPS 4494/2026 और WPS 4758/2026 में पारित होने वाले अंतिम आदेशों के अधीन रहेंगी।
इन सभी नियुक्तियों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सेवाएं (नियुक्ति, सेवा की शर्तें तथा आचरण) नियम, 2017 के प्रावधान भी लागू होंगे।














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