बिलासपुर: हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के एक मृत कर्मचारी की बहू को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद सक्षम अधिकारी को याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमानुसार विचार कर 40 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामला जल संसाधन विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने से जुड़ा है। मृत कर्मचारी की बहू ने नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए संबंधित विभाग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन देने के बावजूद लंबे समय तक विभाग की ओर से इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। आवेदन लंबित रहने के कारण याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में बताया गया कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन संबंधित अधिकारियों के पास विचाराधीन है, लेकिन काफी समय गुजरने के बाद भी उस पर निर्णय नहीं लिया गया है। इससे याचिकाकर्ता को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आवेदन लंबित रहने की स्थिति पर विचार किया। कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन का परीक्षण लागू नियमों और प्रावधानों के अनुसार किया जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम अधिकारी आवेदन से संबंधित दस्तावेजों और अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लें। इसके लिए अदालत ने 40 दिन की समय-सीमा तय की है। इस अवधि के भीतर आवेदन पर नियमानुसार निर्णय लिया जाना होगा।
अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान सामान्यतः शासकीय कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देने के उद्देश्य से किया जाता है। हालांकि नियुक्ति का दावा संबंधित शासन के नियमों, पात्रता और निर्धारित शर्तों के अधीन होता है। प्रत्येक आवेदन पर सक्षम अधिकारी को लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना होता है। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने सीधे नियुक्ति देने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि संबंधित अधिकारी को आवेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। यानी याचिकाकर्ता की पात्रता और नियुक्ति से जुड़े अन्य पहलुओं का परीक्षण विभाग द्वारा किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के बाद अब जल संसाधन विभाग के सक्षम अधिकारी को निर्धारित अवधि में मामले का निराकरण करना होगा। लंबे समय से लंबित आवेदन पर फैसला नहीं होने के कारण दायर की गई याचिका का हाईकोर्ट के निर्देश के साथ निराकरण किया गया।














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