- शशिरत्न पाराशर, उप संचालक

धमतरी : गांवों की अर्थव्यवस्था केवल खेतों में पैदा होने वाली फसल से नहीं, बल्कि किसानों के सामूहिक निर्णय, बाजार की समझ और अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य हासिल करने की क्षमता से भी मजबूत होती है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) की पांच वर्षों की यात्रा इसी बदलाव की प्रेरक कहानी है। यहां किसानों और महिला किसानों ने मिलकर न केवल एक व्यावसायिक मंच खड़ा किया है, बल्कि किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय और ग्रामीण उद्यमिता की एक नई राह भी तैयार की है।
सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत बीते 29 सितंबर को नगरी विकासखंड में आयोजित एफपीसी की वार्षिक आमसभा में करीब 550 शेयरधारकों की मौजूदगी ने इस सामूहिक शक्ति की तस्वीर को और मजबूत किया। नगरी विकासखंड के सभी पांच सीएलएफ से पहुंचे महिला एवं पुरुष शेयरधारकों ने एफपीसी की पांच वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों, व्यवसायिक गतिविधियों, वित्तीय स्थिति, ऑडिट, लाभ तथा आगामी योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही, उन्होंने भविष्य में सामूहिक व्यवसाय को और मजबूत बनाने के लिए अपने विचार भी साझा किए।
चुनौती से विश्वास तक का सफर
गट्टासिल्ली एफपीसी की शुरुआत केवल किसानों को एक संस्था से जोड़ने तक सीमित नहीं थी। शुरुआती दौर में किसानों और विशेषकर महिला किसानों को संगठित करना, उन्हें शेयरधारक के रूप में जोड़ना तथा एफपीसी में सामूहिक स्वामित्व की भावना विकसित करना बड़ी चुनौती थी।
लेकिन समय के साथ यह चुनौती विश्वास में बदलती गई। शेयरधारकों ने समझा कि एफपीसी केवल एक संस्था नहीं, बल्कि उनका अपना किसान-स्वामित्व वाला व्यवसाय है। यही सोच आज एफपीसी की सबसे बड़ी ताकत बन रही है।
वार्षिक आमसभा में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (BoDs) के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शुरुआती वर्षों में संगठन खड़ा करने से लेकर किसानों को व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ने तक कई चुनौतियां सामने आईं। लगातार संवाद, सामूहिक निर्णय और अनुभवों से सीखने के साथ किसानों का विश्वास बढ़ा और एफपीसी की गतिविधियों में उनकी भागीदारी मजबूत होती गई।
आज महिला किसान और अन्य शेयरधारक केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया और सामूहिक व्यवसाय के सक्रिय भागीदार के रूप में आगे आ रहे हैं।
खेत से बाजार तक सामूहिक पहुंच
किसान के लिए उत्पादन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसके उत्पाद का सही बाजार और उचित मूल्य भी है। इसी दिशा में गट्टासिल्ली एफपीसी द्वारा सुगंधित धान, नगरी दुबराज, लघु वनोपज (NTFP) तथा अन्य कृषि एवं वन आधारित उत्पादों के सामूहिक विपणन के अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
सामूहिक विपणन का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर महिला किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे किसानों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार की मांग और मूल्य संबंधी जानकारी के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
एफपीसी मॉडल किसानों को यह समझने का अवसर भी देता है कि वे केवल कच्चे उत्पाद के उत्पादक न रहें, बल्कि संगठन, सामूहिक विपणन, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क के माध्यम से अपनी आय के नए अवसर तलाश सकते हैं।
यही ग्रामीण उद्यमिता की वह सोच है, जिसमें गांव का किसान उत्पादन के साथ-साथ व्यवसाय की समझ भी विकसित करता है।
महिला नेतृत्व ने संभाली कमान
गट्टासिल्ली एफपीसी की यात्रा में महिला किसानों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ से जुड़ी महिलाओं का एफपीसी से जुड़ना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक भागीदारी के नए अवसर खोलता है।
महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या तक सीमित नहीं है। बोर्ड और सामूहिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका यह संदेश देती है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाएं निर्णय लेने वाली, उत्पादक और उद्यमी की भूमिका भी प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं।
महिला नेतृत्व के माध्यम से परिवार की आय, कृषि गतिविधियों और सामुदायिक निर्णयों में महिलाओं की भूमिका को और मजबूती मिलती है। इससे ग्रामीण विकास का लाभ परिवार से आगे बढ़कर पूरे समुदाय तक पहुंचने की संभावना बनती है।
आमसभा बनी कृषि और संस्कृति का संगम
वार्षिक आमसभा में केवल वित्तीय और व्यवसायिक विषयों पर चर्चा नहीं हुई। कार्यक्रम में नगरी की कृषि संस्कृति और सामुदायिक चेतना की भी जीवंत झलक देखने को मिली।
नगरी के पांचों सीएलएफ की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें “छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा क्यों कहा जाता है” जैसे विषयों के साथ पुनर्योजी कृषि पद्धतियों के महत्व को भी प्रस्तुत किया गया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत युगल एवं सामूहिक नृत्य ने कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास भर दिया।
इस तरह आमसभा ने व्यवसाय, कृषि, संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी को एक ही मंच पर जोड़ दिया।
पांच साल की यात्रा, आगे की नई संभावनाएं
गट्टासिल्ली एफपीसी की पांच वर्षों की यात्रा यह बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक संस्थाएं केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास और स्वामित्व की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती हैं।
एफपीसी के माध्यम से किसानों को एक साथ लाने से उनकी सामूहिक क्षमता बढ़ती है। बाजार की जानकारी, उत्पादों का सामूहिक विपणन, कृषि एवं वन आधारित उत्पादों के लिए नए अवसर और महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी—ये सभी पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक संगठित और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
आगे एफपीसी के सामने उत्पादों में विविधता, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बेहतर बाजार संपर्क और डिजिटल माध्यमों के उपयोग जैसी संभावनाएं हैं। यदि किसान-स्वामित्व की भावना को इसी तरह मजबूत किया जाता रहा, तो स्थानीय कृषि एवं वन उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
सेवा संकल्प की भावना को साकार करती कहानी
सेवा संकल्प अभियान के मूल भाव में जनभागीदारी, सशक्तिकरण और विकास की प्रक्रिया में लोगों को सक्रिय भागीदार बनाना शामिल है। गट्टासिल्ली एफपीसी की कहानी इसी भावना को जमीन पर साकार करती दिखाई देती है।
यह कहानी बताती है कि विकास तब अधिक टिकाऊ बनता है, जब उसके केंद्र में वही लोग हों जिनके लिए विकास की योजनाएं बनाई जाती हैं। यहां किसान केवल योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि अपने व्यवसाय के हिस्सेदार और निर्णय प्रक्रिया के सहभागी हैं। महिला किसान केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं।
गट्टासिल्ली की पांच वर्ष की यात्रा इसलिए केवल एक एफपीसी की वार्षिक आमसभा की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें गांव के किसान अलग-अलग उत्पादक से संगठित शक्ति, महिला किसान लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता और कृषि परंपरागत गतिविधि से ग्रामीण उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा रही है।सामूहिकता से स्वामित्व, स्वामित्व से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता—गट्टासिल्ली एफपीसी की यात्रा इसी संकल्प की जीवंत तस्वीर है।














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