राजनांदगांव | जैन बगीचे के चातुर्मासिक प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के सुशिष्य मुनि श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि लोग गैर-जरूरी चीजों के पीछे समय गंवाते हैं। जरूरी बातों पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि हम दिखावे के पीछे भाग रहे हैं। दिखावा काम का नहीं। दिल, व्यवहार, यही असली पहचान है।
ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में प्रवचन के दौरान मुनि ने कहा कि विकल्प न रहने पर ही इंसान सोना-चांदी, जमीन बेचने की सोचता है। उन्होंने कहा कि सब कुछ भगवान की दया से मिला है। जितना संभव हो दान करें। जितना श्रम करना चाहिए उतना श्रम नहीं करते। मैंने कर लिया कहकर हम खुद से झूठ बोलते हैं।
उन्होंने साथियों का ध्यान रखने की बात कही। आत्मिक खुशी का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नाम के लिए नहीं। भलाई के लिए करें। किसी का भला हो जाए तो यही जीवन की उपलब्धि है। उधर मुंबई में शुक्रवार को विहार सेवा अधिवेशन में आचार्य महाबोधि सुरीश्वर म.सा. ने छत्तीसगढ़, राजनांदगांव की प्रशंसा की।
राजनांदगांव में पीयूष सागर सुरीश्वर म.सा. के सानिध्य में हुए विहार सेवा सम्मेलन की अनुमोदना की। सम्मेलन में 350 कार्यकर्ता शामिल हुए थे। अजय सिंगी, ललित भंसाली, भावेश बैद, रोशन गोलछा, जीवनचंद बैद का उल्लेख हुआ।











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