CG : आदिनाथ जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा और आहारचर्या, मुनिश्री ने दिया मोह त्याग का संदेश …

CG : आदिनाथ जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा और आहारचर्या, मुनिश्री ने दिया मोह त्याग का संदेश …

रायपुर । मालवीय मार्ग स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को मुनि संघ के सानिध्य में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और आहारचर्या सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। दिगंबर जैन आदीश्वरधाम, नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुनि आगम सागर महाराज, मुनि पुनीत सागर महाराज, एलक धैर्य सागर महाराज और एलक स्वागत सागर महाराज ससंघ का सानिध्य प्राप्त हुआ।

वर्षायोग समिति के कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन और सचिव राजेश रज्जन जैन ने बताया कि सुबह 8 बजे मूलनायक भगवान को पांडुकशिला पर विराजमान कर मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच अभिषेक, शांतिधारा एवं आचार्यश्री पूजन किया गया। इस अवसर पर रिद्धि-सिद्धि, सुख-शांति की कामना से शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमती कल्पना जैन और अखिल जैन, शंकर नगर को प्राप्त हुआ।

मुनि पुनीत सागर ने समझाया मोह और शरीर की नश्वरता का महत्व
धार्मिक कक्षा में मुनि पुनीत सागर ने मोह और शरीर की नश्वरता पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आंखों पर काला चश्मा होने से वस्तुओं का वास्तविक स्वरूप पहचानना कठिन हो जाता है, उसी प्रकार मोह से प्रभावित ज्ञान व्यक्ति को जीवन के वास्तविक सत्य से दूर कर देता है।

मुनिश्री ने समझाया कि मनुष्य अपने शरीर के प्रति अत्यधिक मोह रखता है, जबकि शरीर नश्वर और परिवर्तनशील है। इसलिए शरीर को ही सब कुछ मानने के बजाय आत्मा की पहचान और आत्म-साधना पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को आसक्ति कम करने और समता भाव अपनाने की प्रेरणा दी।

मुनि आगम सागर ने ‘छह ढाला’ के माध्यम से बताईं बारह भावनाएं
मुनि आगम सागर ने अपनी धार्मिक कक्षा में जैन धर्मग्रंथ ‘छह ढाला’ का अध्ययन कराते हुए बारह भावनाओं को जीवन में आत्मसात करने का महत्व बताया। उन्होंने आत्मा और शरीर के स्वरूप में अंतर समझाते हुए कहा कि शरीर जड़ पुद्गल है, जबकि आत्मा चेतन स्वरूप है। दोनों का स्वभाव अलग है, इसलिए शरीर के प्रति मोह को कम कर आत्मिक चेतना की ओर बढ़ना चाहिए।

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मुनिश्री ने एक दृष्टांत के माध्यम से समता और वीतराग भाव का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति गहने उतारकर सामायिक में बैठा था। इसी दौरान चोर गहने चुराकर ले गया। बाद में जब चोर ने गहने एक सेठ के पास देखे तो उन्हें पहचान लिया। सेठ ने कहा कि जब वह गहने ले जाए गए थे, तब वह ध्यान और सामायिक में लीन था और उन वस्तुओं को अपना नहीं मान रहा था। इस प्रसंग के जरिए मुनिश्री ने वस्तुओं के प्रति ममत्व छोड़ने और संतोषी जीवन अपनाने का संदेश दिया।

नवधा भक्ति के साथ मुनि संघ को कराया आहार
सुबह 9:30 बजे नवधा भक्ति के साथ मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विनय और भक्तिभाव से आहारदान का लाभ लिया। मुनि संघ को आहार देने का सौभाग्य पुष्पेंद्र जैन, टैगोर नगर, श्रीमती सुनीला जैन एवं गणेशराम नगर ग्रुप, रायपुर, श्रीमती पुष्पा देवी जैन और बंशीलाल जैन को प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में वर्षायोग समिति के पदाधिकारियों, मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं, श्रावक-श्राविकाओं और जैन समाज के सदस्यों की सहभागिता रही। अभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन और आहारचर्या के साथ आयोजन धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।

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