भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: HC की निगम को फटकार, 10 दिन में दस्तावेज सौंपने के आदेश

इंदौर

भागीरथपुरा में रहवासियों को मल-मूत्र युक्त पानी पिलाने वाले नगर निगम की एक और लापरवाही सामने आई है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगम ने मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग को अब तक भागीरथपुरा क्षेत्र में बिछाई गई पाइप लाइनें, टेंडर से जुड़े दस्तावेज, दूषित पानी की वजह से जान गंवाने वालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं सौंपे।

कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और आदेश दिया कि निगम दस दिन के भीतर पूरे दस्तावेज आयोग को सौंप दे। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को एक साथ सुनवाई हुई।

दस्तावेज न मिलने से जांच के अंतिम निष्कर्ष में बाधा

आयोग ने गुरुवार को अंतरिम जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। इसमें कहा है कि चूंकि निगम से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं है। कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वे कौन अधिकारी थे जिनकी लापरवाही की वजह से भागीरथपुरा दूषित पानी कांड हुआ और 36 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

सीवेज मौत पर 30 लाख, भागीरथपुरा कांड में सिर्फ 2 लाख

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि सीवेज लाइन में उतरे दो लोगों की मृत्यु पर उनके परिजनों को तो 30-30 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया, लेकिन भागीरथपुरा कांड में सिर्फ दो-दो लाख रुपये दिए गए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट सामने आने दीजिए, इस बारे में भी विचार करेंगे। गुरुवार दोपहर ठीक 2.30 बजे न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भागीरथपुरा मामले की सुनवाई शुरू हुई।
दस्तावेज सौंपने में देरी पर कोर्ट सख्त, आयोग में कर्मचारी तैनात करने के निर्देश

एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे पढ़ने के बाद कोर्ट ने निगम के वकील से कहा कि निगम को दस्तावेज सौंपने में क्या दिक्कत है। निगम के वकील ने कहा – हम दस्तावेज दे रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट दो मार्च को तैयार की है और इसमें साफ लिखा है कि दस्तावेज नहीं मिले हैं। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि आमजन आयोग के पास भागीरथपुरा मामले में दस्तावेज, साक्ष्य, शिकायत लेकर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन वहां कोई कर्मचारी ही नहीं है जो उनकी शिकायत या दस्तावेज ले सके। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग में इस कार्य के लिए कर्मचारी तैनात किए जाएं।

क्या पानी में मिलाया गया था जानलेवा केमिकल?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि शहर में 110 टंकियां हैं, लेकिन सिर्फ भागीरथपुरा टंकी से वितरित हुए पानी से ही मौतें हुई हैं। जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भागीरथपुरा टंकी में कुछ ऐसा मिलाया गया जो जानलेवा साबित हुआ। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा टंकी में केमिकल की कुछ अतिरिक्त मात्रा मिलाई गई थी। उन्होंने इस संबंध में एक पेन ड्राइव भी कोर्ट में प्रस्तुत की

मुआवजे की राशि पर एडवोकेट मनीष यादव की दलील

एडवोकेट मनीष यादव ने मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले शहर में सीवेज में उतरने से हुई दो लोगों की मौत के मामले में शासन ने उनके परिजनों को 30-30 लाख रुपये की सहायता की, जबकि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये दिए गए। यह राशि भी शासन ने नहीं दी बल्कि रेडक्रास सोसायटी से दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट में इसे लेकर कहा है कि अंतिम रिपोर्ट में इस बिंदु को शामिल करेंगे।

आयोग नियुक्त करेगा शिकायत अधिकारी

कोर्ट ने न्यायिक आयोग से कहा है कि वह आमजन की शिकायत, सुझाव, दस्तावेज, साक्ष्य आदि दर्ज कराने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति करे ताकि आमजन सुविधाजनक तरीके से इस मामले में साक्ष्य दे सकें। आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। सुनवाई के दौरान एडवोकेट अनिल ओझा, एडवोकेट विभोर खंडेलवाल, निगम की ओर से एडवोकेट ऋषि तिवारी आदि ने पैरवी की।

अदालत में हुई जिरह के कुछ अंश

    कोर्ट: आप यह बताओ पूरा रिकॉर्ड कब देंगे?
    निगम के वकील: रिकॉर्ड दे दिया था, आयोग ने दो मार्च को पत्र जारी कर कुछ और रिकॉर्ड मांगा है।
    कोर्ट: रिकॉर्ड देने में क्या दिक्कत है?
    निगम के वकील: कुछ रिकॉर्ड आईडीए से संबंधित है। वहां से बुलवाना पड़ेगा, जैसे ही रिकॉर्ड वहां से मिलेगा हम सौंप देंगे।
    कोर्ट: आप दस दिन में अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दें।

 

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