राजनांदगांव। श्रम न्यायालय में बाल श्रम अधिनियम के एक मामले में जमानत दिलाने के लिए पेश की गई जमीन के कागजात फर्जी निकले। जांच में सामने आया कि जमानतदार ने जिस जमीन को अपनी बताकर शपथ-पत्र दिया था, वह वास्तव में किसी महिला के नाम दर्ज है।
मामला बाल श्रम कानून के तहत चल रहे मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें हुजैफा अली और राकेश कुमार साहू मुख्य आरोपी हैं। इनकी जमानत के लिए जमानतदार मोहम्मद बसी ने अपनी संपत्ति दिखाई और शपथ-पत्र दाखिल किया। अदालत ने बाद में राजस्व रिकॉर्ड मंगवाए तो पूरी सच्चाई खुल गई।
माननीय न्यायाधीश श्री अमित जिंदल ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए कोतवाली थाने को पत्र लिखा। न्यायालय का कहना था कि तथ्यों को छिपाकर जानबूझकर अदालत को धोखे में रखा गया, जिससे आरोपियों को गलत तरीके से जमानत मिल गई।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए।
कोतवाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर जमानतदार मोहम्मद बसी तथा दोनों मूल आरोपियों हुजैफा अली व राकेश कुमार साहू के खिलाफ न्यायालय को धोखा देने और आपराधिक साजिश की धाराओं में नया मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच में जुटी है।
यह घटना एक बार फिर जमानत प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता की सख्त जांच की जरूरत को सामने लाती है।
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