राजनांदगांव : डॉक्टरों की कमी, अभी 20 से ज्यादा छुट्टी पर, इंटर्न की हड़ताल से ठप होगा इलाज…

राजनांदगांव , मेडिकल कॉलेज में पहले से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। वर्तमान में कई विभागों के 20 से ज्यादा डॉक्टर्स आगे की पढ़ाई और परीक्षा के साथ निजी कारणों से अवकाश पर हैं। अब तक इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे मरीजों का इलाज चल रहा था। लेकिन इंटर्न डॉक्टरों ने सैलरी बढ़ाने की मांग पर बेमियादी हड़ताल का अल्टीमेटम दे दिया। आम दिनों में यहां की ओपीडी में रोज औसत 650 से 700 मरीज पहुंचते हैं। बीमारियों के सीजन में उनकी संख्या 750-800 हो गई ऐसे में मरीजों का इलाज प्रभावित होगा।

मेडिसिन, ऑर्थो, सर्जरी विभाग में डॉक्टरों की कमी होने से बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। ऑर्थो और सर्जरी से संबधित ऑपरेशन टालने पड़ते है। कई गंभीर मामलों में केस रेफर करने पड़ रहे। गायनिक विभाग में जरूरत 8 के मुकाबले केवल तीन डॉक्टर्स है। डॉक्टर्स और स्टाफ कम होने से जांच, इलाज, ब्लड सैंपल जांच और रिपोर्ट देने में देरी के कारण आगे इलाज में देर हो रही। सीमित डॉक्टरों पर क्लास लेने और इलाज का दबाव है। इंटर्न स्टाइपेंड 30 हजार करने की मांग पर बेमियादी हड़ताल करेंगे।

संविदा पर प्रोफेसर्स के 10, एसोसिएट प्रोफेसर्स के 18, असिस्टेंट प्रोफेसर्स के 28, सीनियर रेसीडेंट 16, डेमोंस्ट्रेटर के 5 कुल 77 पदों में वॉक-इन इंटरव्यू से भर्ती की जाएगी। एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, टीबी एवं चेस्ट, रेडियोलॉजी, मनोरोग, कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, गायनिक, नेफ्रोलॉजी में पद सालों से खाली है। इस कारण यहां मरीजों को नहीं बेहतर इलाज मिल पा रहा और नहीं मेडिकल स्टूडेंट्स की नियमित क्लासेस लग पाती है। इसकी वजह परेशानी बढ़ती ही जा रही है।

See also  CG : कोरबा में हाथी उत्पात, किसान की मौत …

साल 2014 में करीब 500 करोड़ की लागत से बने 600 बेड वाला मेडिकल कॉलेज शुरू होने के 12 साल बाद विशेषज्ञों की कमी है। यहां कुल 29 विभाग संचालित है। यहां एमबीबीएस की 125 सीटें है। कुछ विभागों में आज तक नियमित डॉक्टरों की कमी है। केसीजी एमएमसी, राजनांदगांव, बालोद, कवर्धा जिले के मरीजों का एकमात्र सहारा सरकारी मेडिकल कॉलेज का यह हाल है। दो सालों में करीब 18 डॉक्टरों ने कम वेतन के कारण नौकरी छोड़ कर दूसरे प्राइवेट अस्पतालों में ज्वाइन किया है।इससे मरीजों की परेशानी बढ़ी है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों, सीनियर, जूनियर डॉक्टरों, स्टाफ नर्सेज, तृतीय-चतुर्थ श्रेणी, पैथालॉजी लैब में 12 सालों से स्टाफ की कमी है। कॉर्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जन, हार्ट विशेषज्ञ नहीं है। स्टाफ नर्स के स्वीकृत पद 176, कार्यरत 135, रिक्त पदों की संख्या 41 है। टेक्नीशियन स्वीकृत 13, कार्यरत 10, रिक्त 3 पद है। रेडियोग्राफर स्वीकृत 3, कार्यरत 3 है। वार्ड ब्वाय, आया सहित अन्य स्वीकृत 205 पदों में संविदा और मेटास कंपनी का स्टाफ है। स्वीपर के 18, लैब अटेंडेंट के 2 पद हैं। अन्य स्वीकृत 59 पदों में 25 कार्यरत, वहीं 34 पद खाली पड़े हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *