राजनांदगांव : किसी को बिना इलाज नहीं लौटाया गया : डॉ. जेठानी…

राजनांदगांव , मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों ने 15 हजार स्टाइपेंड को 30 हजार करने की मांग पर हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण ओपीडी में मरीजों की जांच और इलाज प्रभावित रहा। सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी की जिम्मेदारी संभाली लेकिन इंटर्न डॉक्टर्स नहीं होने से मरीजों की जांच और इलाज में समय ज्यादा लगा। इस बीच मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे और उन्हें दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग को लेकर मेन गेट के सामने नारेबाजी करते रहे।

इंटर्न डॉक्टरों ने एचओडी विभाग प्रमुखों को हड़ताल की सूचना देने के बाद मंगलवार से काम बंद, कलम बंद बेमियादी हड़ताल की शुरुआत कर दी है। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच और इलाज प्रभावित हो रहा है। सरकार से 15900 की जगह 30 हजार स्टाइपेंड की मांग पर इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया। एक दिन पहले प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से स्टाइपेंड पर निर्णय लेने की मांग की थी।

आईएमए-एमएसएन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शाहदील खुशरु ने बताया कुछ इंटर्न डॉक्टरों की इमरजेंसी सेवाओं में ड्यूटी लगाई गई थी। उन्होंने हड़ताल से पहले और ड्यूटी के बाद हड़ताल में शामिल होकर नारेबाजी की। इमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया गया, तीन शिफ्ट में ड्यूटी की। पदाधिकारियों की स्वास्थ्य मंत्री और सचिव से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर पहले पांच से ज्यादा बार वार्ता हो चुकी है लेकिन तीन सालों से स्टाइपेंड नहीं बढ़ा। मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। ज़रुरत पड़ने पर इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार करेंगे।

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