रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि संसार में जीव के अनादिकाल से भटकने का सबसे बड़ा कारण अज्ञान है। जब तक मनुष्य जिनवाणी से सही ज्ञान प्राप्त कर यह नहीं समझेगा कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है, तब तक मोक्ष का मार्ग कठिन बना रहेगा।
मुनिश्री ने कहा कि वीतरागों के वचनों से ही जीव वास्तविक ज्ञान प्राप्त करता है। वीतरागों के प्रति विनय और अनुग्रह की भावना होने पर उनके उपदेश आत्मकल्याण का माध्यम बनते हैं। मुनिश्री ने बताया कि अज्ञान के प्रति पक्षपात और ज्ञान के प्रति दुर्भाव ही अज्ञान ध्यान है। जो व्यक्ति अज्ञान ध्यान में जीवन बिताता है, वह जन्म-मरण के चक्र में ही भटकता रहता है।
मुनिश्री ने अज्ञान के तीन प्रकार बताते हुए कहा कि संशय, विपर्यास और अनुपयोगी ज्ञान मनुष्य को सत्य से दूर ले जाते हैं। प्रभु के वचन व्यक्ति को केवल सुविधा के दायरे में नहीं रखते, बल्कि पुरुषार्थ के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि जो स्वयं संशय में रहता है, वह दूसरों के मन में भी संशय पैदा करता है। संसार के भौतिक सुखों को ही वास्तविक सुख मानना भी अज्ञान है। यदि लंबे समय से पूजा-पाठ और धर्म साधना करने के बाद भी मन में सही भावना नहीं जागती, तो साधक अपने लक्ष्य से भटक जाता है।
मुनिश्री ने कहा कि जैन शास्त्रों के अनुसार माता-पिता का पहला कर्तव्य अपने बच्चों को देव, गुरु और धर्म से जोड़ना है। यही परिवार के वास्तविक कल्याण का मार्ग है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कहा कि अज्ञान ध्यान छोड़कर ज्ञान और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने से ही भव सुधरेगा।
13 वर्ष की आयु में 8 उपवास,सभी ने की अनुमोदना
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुणीया व महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि सर्वमंगलमय वर्षावास 2026 में तपस्या का कर्म जारी है।मंगलवार को अठाई की तपस्या आरवी झाबक की रही। 13 वर्ष की आयु में आठ उपवास की कठिन तपस्या का बहुमान धर्मसभा में किया गया। सभी ने तपस्या व तपस्वी की खूब अनुमोदना की। 8 दिन से कठिन तप केवल गर्म पानी पीकर जारी है। गर्म पानी का सेवन सुबह 10 बजे के पश्चात एवं सूर्यास्त से पूर्व साढ़े 4 बजे तक ही किया जाता है।
45 श्रावक-श्राविकाओं का पंच परमेष्ठी श्रेणी तप जारी
तप की कड़ी में पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की प्रथम श्रेणी पूर्ण हो गई है। दूसरी श्रेणी का प्रथम उपवास मंगलवार को रहा। 45 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा तप किया जा रहा है। श्रेणी तप के दूसरे चरण में तपस्वी एक उपवास फिर व्यासना, दो उपवास फिर व्यासना,तीन उपवास फिर व्यासना करेंगे। तपस्वी उपवास के दिन केवल गर्म पानी ग्रहण करते हैं। यह 49 दिनों की कठिन तप है।
इसी तरह गिरनार तप का शुभारंभ 8 अगस्त से होगा,जो 28 अगस्त को पारणा होगा।
इस तपस्या में 9 उपवास, 9 व्यासना, एक तेला और फिर पारणा होगा। अब तक 80 श्रावक-श्राविकाओं के नाम चातुर्मास समिति के पास आ गए हैं,जो 8 अगस्त से गिरनार तप प्रारम्भ करेंगे।






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