CG : 4. समय पर खाना नहीं मिलता, जरूरतें भी पूरी नहीं करते …

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भिलाई l बुढ़ापे में जिन बच्चों के सहारे की उम्मीद रहती है, उन्हीं से परेशान होकर शहर के बुजुर्ग अब थाना के पारिवारिक परामर्श केंद्र पहुंच रहे हैं। 11 जनवरी से 20 सितंबर तक 124 बुजुर्गों ने बेटे, बेटी और बहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ज्यादातर ने समय पर भोजन नहीं देना, देखरेख नहीं करना, घर में अकेला छोड़ना, अस्पताल नहीं ले जाना, मारपीट और दुर्व्यवहार जैसे आरोप लगाए हैं। कई बुजुर्गों का कहना है कि बेटे-बहू उन्हें घर में छोड़कर घूमने चले जाते हैं। कुछ मामलों में बच्चों को दादा-दादी से मिलने तक नहीं दिया जाता।

थाने में आने वाली हर शिकायत में पुलिस सीधे कानूनी कार्रवाई नहीं करती। पहले बुजुर्ग और परिवार के सदस्यों की काउंसिलिंग की जाती है। बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास होता है। इसी प्रक्रिया में 57 मामलों में परिवारों के बीच समझौता कराया गया। जिन मामलों में बातचीत से समाधान नहीं निकला, उनमें कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। ऐसे 24 मामले न्यायालय भेजे गए हैं। 24 मामलों को नस्तीबद्ध किया गया, जबकि 19 मामलों में अभी काउंसिलिंग जारी है। बता दें कि दुर्ग-भिलाई में बुजुर्गों की इसी तरह की समस्याओं से जुड़े कई तरह की शिकायतें हैं, लेकिन ज्यादातर मामले जागरूकता की कमी और बदनामी के डर से सामने नहीं आते। डॉ. अविनाश, मनोचिकित्सक

परिवारों में संपत्ति के बंटवारे के साथ बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी बांटने के मामले सामने आ रहे हैं। बोरसी निवासी रिटायर्ड बीएसपी कर्मी के दो बेटों ने बंटवारे के साथ यह भी तय कर दिया कि मां एक बेटे के साथ रहेगी और पिता दूसरे बेटे के साथ। इससे वर्षों तक साथ रहे बुजुर्ग दंपती बुढ़ापे में अलग-अलग रहने को मजबूर हो गए हैं।

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एक उम्र के बाद बुजुर्गों के स्वभाव में बदलाव आता है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होना आम बात हो सकती है। यह केवल घरेलू नहीं, बल्कि सामाजिक समस्या भी है। बुजुर्गों के लिए लाइब्रेरी, सोसायटी में वॉकिंग और लाफिंग ग्रुप बनाए जाने चाहिए। परिवार के सदस्यों को घर में बैठकर उनकी बातें सुननी चाहिए। उन्हें घरेलू निर्णयों में शामिल करना चाहिए, ताकि घर में उनका महत्व बना रहे।

ज्यादातर बुजुर्गों को नियमित दवा और इलाज की जरूरत होती है, लेकिन कई शिकायतों में बेटे-बहू पर उनकी बीमारी को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप है। सेक्टर-6 के 71 साल के वृद्ध ने अस्पताल ले जाने के लिए रिश्तेदारों या पड़ोसियों पर निर्भर रहने की शिकायत की है। कुछ बुजुर्गों ने घर में खाना और जरूरत का सामान नहीं मिलने की शिकायत की है।

कोहका निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग का आरोप है, उनके बेटे-बहू उन्हें घर में अकेला छोड़कर घूमने चले जाते हैं। समय पर भोजन नहीं मिलता और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी होती है। अनदेखी से वे खुद को असहाय महसूस करते हैं।

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