राजनांदगांव , स्कूलों में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों की पहचान शुरुआती स्तर पर कर रहे हैं जिन्हें विशेष शैक्षणिक सहायता की जरूरत है। इसके लिए शिक्षक 2.0 एप से बच्चों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
शिक्षकों ने एप पर उपलब्ध 10 संवेदनशील वीडियो देखे इसके बाद शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्राशस्त: 2.0 एप से बच्चों में दिव्यांगता और विशेष ज़रुरत से जुड़े शुरुआती संकेतों की पहचान भी की जा रही है। इसका उद्देश्य जिन बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग, इलाज या अन्य जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता है, उन्हें समय पर सहायता मिल सके। स्क्रीनिंग के दौरान विशेष आवश्यकता के संकेत मिलने पर बच्चे को आगे की जांच और सहायता के लिए चिन्हित किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों की भी 2.0 स्क्रीनिंग होगी। कम उम्र में विशेष आवश्यकता की पहचान होने से बच्चों को आगे की पढ़ाई में सहयोग मिलेगा। दिव्यांग बच्चों की पहचान करने सभी ब्लॉकों में पहचान शिविर आयोजित किया जाएगा। अभी अभियान की शुरुआत हुई है। इसे लेकर के शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पूरी तरह से अलर्ट हैं। इसकी बाकायदा मॉनिटरिंग भी की जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अभियान से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को विस्तार के साथ बताया गया है।
स्कूलों में नामांकित कुल बच्चों की तुलना में दिव्यांग बच्चों का नामांकन करीब 0.8 प्रतिशत बताया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। कई बच्चों में शुरुआती स्तर पर विशेष आवश्यकता की पहचान नहीं होने के कारण वे जरूरी सुविधाओं और विशेष शैक्षणिक सहयोग से वंचित रहते हैं। नई स्क्रीनिंग व्यवस्था इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित है। स्क्रीनिंग के दौरान संकेत मिलने पर बच्चे को आगे जांच के लिए चिन्हित करेंगे।










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