राजनांदगांव , नशामुक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी करने और विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने अभियान चलाया जा रहा है। शिवनाथ साइंस कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ जीई रोड स्थित सत्यानंद योग आश्रम में हुआ। ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर आयोजित शिविर में पहुंचे अतिथियों ने कार्यक्रम में शामिल युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
शिविर में जनसेवा, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। मुख्य अतिथि राजगामी संपदा न्यास के पूर्व अध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने कहा राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने अवसर देती है। युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनकी ऊर्जा और सोच समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. निर्मला उमरे, रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एसआर कन्नौजे, जनभागीदारी समिति सदस्य नमिता जैन, राजेश यादव, पंकज कुंजरेकर, आशीष सूरे, प्राध्यापक मौजूद रहे। संचालन और आभार प्रदर्शन डॉ. एसआर कन्नौजे ने किया। शिविर का समापन 2 नवंबर को होगा।
राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने कहा संतोष अग्रवाल ने युवाओं से नशे से दूर रहकर दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लेने कहा। अध्यक्षता कर रहे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष सचिन बघेल ने कहा ऐसे शिविर विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। नशामुक्त समाज का निर्माण केवल जागरूकता कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि युवाओं के व्यवहार में बदलाव से संभव है। युवा स्वयं नशे से दूरी बनाएं।
नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता पर फोकस सात दिवसीय विशेष शिविर की थीम ‘नशा मुक्त भारत के लिए युवा’ रखी गई है। विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने, समाज में नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने, सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने प्रयास करेंगे। शिविर के दौरान अफसरों, विषय विशेषज्ञों, समाजसेवियों के मार्गदर्शन में बौद्धिक परिचर्चा की जाएगी। योगाभ्यास, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली, सामाजिक समझ बढ़ाना है।










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