राजनांदगांव , ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य समयप्रभ सागर ने बुधवार को कहा कि भले ही एक छत के नीचे हों फिर भी हम साथ-साथ हैं नहीं कह सकते। साथ-साथ रहने के लिए आपस में प्रेम होना जरूरी है। हमारा आपस में प्रेम नहीं है तो हम साथ-साथ हैं, कैसे कह सकते हैं। परिवार के लोगों का आपस में प्रेम का भाव जरूरी है। आपस में प्रेम होगा तभी एक-दूसरे को समझ सकेंगे। कहा कि संयोग सबके साथ होता है।
सबका अपना अपना महत्व होता है और सबके अलग-अलग दायित्व होते हैं। हम अपने को मिले दायित्व का निर्वहन करते हैं। कहा कि पांच तत्वों का जीवन में बड़ा महत्व है। हमें इन्हें समझने का प्रयास करना होगा और यदि हम इन्हें समझ जाते हैं तो हमारा जीवन खुशमय हो जाएगा। हमारे पिछले भव के कर्मों के कारण हमें पुण्य मिलता है। हमें इस पुण्य को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। जब पुण्य का उदय होता है तब खुशियां ही खुशियां आती है। परिवार में एक-दूसरे के प्रति प्रेम का भाव होना चाहिए तभी वह परिवार सफलता की सीढ़ी चढ़ता है।













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