राजनांदगांव , मिट्टी में आस्था के रंग भरकर भगवान की प्रतिमाओं को आकार देने वाले सिंगदई के मूर्तिकारों को अब अपनी कला के लिए व्यवस्थित स्थान और बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है। पारंपरिक मूर्तिकला को संरक्षित करने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में सिंगदई में सामूहिक मूर्ति निर्माण भवन बनाने की पहल की जाएगी। इसके साथ ही युवाओं को मूर्ति निर्माण की बारीकियां सिखाने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। पूर्व सांसद अभिषेक सिंह ने शुक्रवार को सिंगदई पहुंचकर स्थानीय मूर्तिकारों से संवाद किया और उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं तथा पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने में आ रही चुनौतियों की जानकारी ली। इस दौरान मूर्तिकारों ने मिट्टी से निर्मित बाल गणेश की सुंदर प्रतिमा भेंट कर उनका स्वागत किया।
भगवान की प्रतिमाओं को आकार देने वाले कलाकारों से आत्मीय चर्चा के दौरान अभिषेक सिंह ने उनके काम और कला की सराहना की। उन्होंने कहा कि मिट्टी से भगवान की प्रतिमाएं बनाने की परंपरा हमारी समृद्ध लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। सिंगदई के मूर्तिकार वर्षों से अपनी कला के माध्यम से लोगों की आस्था और त्योहारों को जीवंत बनाते आ रहे हैं। ऐसे में इस परंपरा का संरक्षण करना और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ पारंपरिक कलाकारों के सामने कई तरह की चुनौतियां आ रही हैं। प्रतिमा निर्माण के लिए पर्याप्त स्थान, आवश्यक सुविधाएं और नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था उपलब्ध कराना इस कला को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने भवन निर्माण का दिया आश्वासन मूर्तिकारों की मांगों और आवश्यकताओं को देखते हुए अभिषेक सिंह ने सामूहिक मूर्ति निर्माण भवन के निर्माण तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से चर्चा की। उन्होंने सिंगदई के मूर्तिकारों की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया और पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए भवन की आवश्यकता बताई। डॉ. रमन सिंह ने विषय को गंभीरता से लेते हुए आने वाले दिनों में सिंगदई के मूर्तिकारों के लिए सामूहिक मूर्ति निर्माण भवन की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। प्रस्तावित भवन बनने से मूर्तिकारों को प्रतिमाएं तैयार करने के लिए एक ही स्थान पर व्यवस्थित जगह मिल सकेगी। इससे काम के दौरान होने वाली परेशानियां कम होंगी।
कार्यशालाओं से युवाओं को जोड़ने की तैयारी की जा रही सामूहिक मूर्ति निर्माण भवन के साथ ही नई पीढ़ी को पारंपरिक मूर्तिकला का प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से युवा मिट्टी का चयन, प्रतिमा का प्रारूप तैयार करना, आकार देना, सजावट और प्रतिमा निर्माण की अन्य बारीकियां सीख सकेंगे। इससे वर्षों से चली आ रही कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। सिंह ने कहा कि लोककला और पारंपरिक विरासत का संरक्षण केवल संस्कृति को बचाए रखने तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े कलाकारों और शिल्पकारों का सम्मान, उनकी आजीविका तथा आत्मनिर्भरता मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।














Leave a Reply