रायपुर : छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू होने जा रही है। किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। इस वर्ष कुल 3,100 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। वहीं, पात्र किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा में 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को रायपुर के सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में आयोजित ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में कहा कि किसानों की समृद्धि और उनकी आय बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने प्रदेशभर से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करते हुए कृषि क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
360 नए केंद्रों से मिलेगी बड़ी राहत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में धान खरीदी व्यवस्था को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार व्यापक तैयारियां कर रही है। इस वर्ष 360 नए धान खरीदी केंद्र शुरू किए जाएंगे, जिससे दूरदराज के गांवों के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी।नए केंद्रों के खुलने से मौजूदा खरीदी केंद्रों पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को धान बेचने में अनावश्यक परेशानी न हो और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती-किसानी से जुड़ी हुई है। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, खेती की लागत कम करना और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना है। सिंचाई, कृषि ऋण और नई तकनीक जैसी सुविधाओं के विस्तार से खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सिंचाई परियोजनाओं पर 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की नई सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 1,500 पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए करीब 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं का काम पूरा होने के बाद प्रदेश में लगभग 76 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव सहित कई सिंचाई परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना और किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करना है।
किसान क्रेडिट कार्ड से कृषि ऋण में मिली राहत मुख्यमंत्री साय ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवस्था से किसानों को खेती के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने में मदद मिली है।उन्होंने बताया कि पहले किसानों को कृषि कार्यों के लिए महंगी ब्याज दरों पर ऋण लेना पड़ता था। एक समय सहकारी बैंकों से कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जबकि अब राज्य में पात्र किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे किसानों पर ब्याज का बोझ कम हुआ है और खेती के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना आसान हुआ है। प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि पद्धतियों और नवाचारों को अपनाने वाले किसान अन्य किसानों के लिए प्रेरणा हैं। ऐसे किसानों को सम्मानित करने से कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों और बेहतर खेती की पद्धतियों को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने मनहरण लाल पाण्डेय के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन जनसेवा और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहा। विशेष रूप से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में उनके योगदान को याद किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने भी मनहरण लाल पाण्डेय के सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किसान परिवार से आते हैं और खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों को समझते हैं। समारोह में कर्मवीर सिंह, अखिलेश सोनी, नवीन मार्कण्डेय, राम गर्ग, आलोक चंद्र ठाकुर, हर्षिता पाण्डेय, अनुराग पाण्डेय सहित जनप्रतिनिधि, स्मृति संस्थान के सदस्य और प्रदेशभर से आए किसान उपस्थित रहे। राज्य सरकार के इन निर्णयों से आगामी धान खरीदी सीजन में किसानों को सुविधाएं मिलने और सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।










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